गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में शुक्रवार को अंग्रेजी विभाग की ओर से राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। ‘फिफ्टी इयर्स ऑफ कल्चरल स्टडीज : प्रामिस यूफोरिया एंड ऑफ्टर’ विषय पर मंथन के लिए आयोजित इस सेमिनार के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रो. रानू उनियाल ने समाज में सोशल मीडिया के बढ़ते दायरे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फेसबुक और वाट्सएप के बढ़ते इस्तेमाल से आत्ममुग्धता की प्रवृत्ति में तेजी से इजाफा हो रहा है। यह विकास में बाधक है। प्रो. उनियाल ने सेल्फी कल्चर को भी आड़े हाथों लिया।
उन्होेंने कहा कि यह दौर संस्कृति की संकीर्णता का है। प्रो. उनियाल ने इस बहस को स्त्री विमर्श से जोड़ा और संस्कृति के संवाद को नया आयाम दिया। उन्होंने द्रोपदी, सीता और पार्वती का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें भारतीय संस्कृति को और मजबूत बनाने के लिए उनके दिखाए रास्ते पर चलना होगा। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने पूर्वांचल में अंग्रेजी विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करने के लिए विभागाध्यक्ष की सराहना की।
कुलपति ने संस्कृति के पांच चरण भी बताए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने ‘सेमिनार सिटी’ नाम के न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। इसी क्रम में शुक्रवार की शाम एक सांस्कृतिक संध्या हुई। इसका मुख्य आकर्षण जॉन ओस्वर्न ‘लुक बैक इन एंगर’ नाटक था, जिसका मंचन विभाग के विद्यार्थियों की ओर से किया गया। इस दौरान शोध-छात्राओं की ओर से तैयार की गई 10 मिनट की डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई, जिसमें विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों को दर्शाया गया। मीराबाई की संगीतमयी यात्रा की प्रस्तुति ने भी उपस्थित जनसमूह का मन मोहा। अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. नंदिता सिंह ने किया।
संचालन की जिम्मेदारी डॉ. अजय कुमार शुक्ल ने निभाई। इस दौरान डॉ. अवनि कुमार राय, प्रो. एस भट्टाचार्य, प्रो. प्रताप सिंह, प्रो. आरडी राय, डॉ. सुधाकर लाल श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। बृहस्पतिवार को विषय के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए 42 पर्चे भी पढ़े गए।
कार्बन के चुंबकीय अनुप्रयोग पर हुई चर्चा
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञान विभाग में बृहस्पतिवार से शुरू हुए राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन भी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वान शिक्षकों ने हिस्सा लिया और तय विषय ‘क्रियाशील पदार्थ’ पर व्याख्यान दिया। तीन सत्रों में आयोजित सेमिनार के पहले सत्र में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के प्रो. रामगोपाल, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली के प्रो. केदार सिंह, बीएचयू के प्रो. डीके मंडल, शारदा यूनिवर्सिटी के प्रो. एनबी सिंह और लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रो. आरके शुक्ल का व्याख्यान हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रो. रामगोपाल ने की।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रो. आरके शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित दूसरे सत्र में प्रो. आरपी शर्मा, प्रो. बालक दास, प्रो. देवेंद्र कुमार, प्रो. आके सिंह ने आमंत्रित व्याख्यान दिया। तीसरे सत्र में इंदिरा गांधी परमाणु केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नीरज शुक्ला का चुंबकीय अनुप्रयोग के संबंध में आमंत्रित व्याख्यान दिया, जिसे उपस्थित विद्वानों ने जमकर सराहा। इस सत्र में 11 आमंत्रित शोध पत्र पढ़े गए, जबकि छह मौखिक शोध पत्रों और 56 शोध पत्रों का प्रस्तुतिकरण हुआ। इस दौरान प्रो. एसके सेनगुप्ता, प्रो. आरपी यादव, प्रो. एचएस शुक्ल, प्रो. जयप्रकाश, प्रो. एलएन त्रिपाठी, प्रो. माहेश्वर मिश्र, प्रो. जेएन राय आदि मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी ने आभार ज्ञापन किया।
अंग्रेेजी के वर्चस्व से अराजक हुई शिक्षा : प्रो. शंकर
किसी भी देश का बौद्धिक पतन यूं ही नहीं होता। इसकी पुख्ता वजह होती है। उसे तलाश कर दूर करने की जरूरत है। ये बातें एनसीईआरटी नई दिल्ली से आए प्रो. शंकर शरण ने शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षा संकाय में शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में कही।
‘भारतीय संदर्भ में शिक्षा के मुद्दे एवं चुनौतियां’ विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने महर्षि अरविंद के बताए उन तीन गुणों की चर्चा की, जिनके क्षरण से बौद्धिक पतन होता है। प्रो. शरण ने बताया कि विवेकपूर्ण विचार करने की क्षमता, तुलना एवं विभेद करने की क्षमता और अभिव्यक्ति की क्षमता, जैसे ही इन तीन गुणों का ह्रास शुरू होता है, वैसे ही बौद्धिक पतन भी शुरू हो जाता है। शिक्षा की अराजक और अस्त-व्यस्त स्थिति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके दो कारण हैं- अंग्रेजी का बढ़ता वर्चस्व और शिक्षा में राजनीतिक विचारधाराओं का प्रसार।
कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने पढ़ाई की नींव मजबूत करने की अपील की। सेमिनार के पहले सत्र में शिक्षा की समसामयिक समस्या और दूसरे सत्र में शिक्षक प्रशिक्षण में प्रयोगात्मक पक्ष पर चर्चा हुई। स्वागत भाषण देते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. शैलजा सिंह ने सेमिनार के विषय का औचित्य बताया। संगोष्ठी की रुपरेखा प्रो. सुमित्रा ने रखी। संचालन डॉ. सुषमा पांडेय ने किया।