जिला पंचायत अध्यक्ष पद के अधिकृत प्रत्याशी का विरोध समाजवादी पार्टी के कई नेताओं को भारी पड़ गया। जिला प्रवक्ता को निष्कासित करने के साथ ही चार और नेताओं को नोटिस देकर तीन दिन में जवाब मांगा गया है। दो युवा संगठनों के पदाधिकारी भी हटाए गए हैं। यह कार्रवाई करके प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि बागी नेताओं से पार्टी सख्ती से निपटने के मूड में है।
बता दें कि शनिवार को समाजवादी पार्टी की ओर से सर्किट हाउस में जिला पंचायत सदस्यों और पार्टी दफ्तर पर संचालन समिति की बैठक बुलाई गई थी। भाजपा के विधायक विजय बहादुर यादव के घर पर भी उसी समय बैठक तय थी, जिसमें जिला पंचायत के सदस्यों को बुलाया गया था।
सपा के कई नेता पार्टी की बैठकों की बजाय भाजपा विधायक के घर हुई बैठक में शरीक हुए। इन नेताओं ने विधायक के भाई को अध्यक्ष पद का चुनाव जिताने का संकल्प दोहराया। साथ ही नहीं प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर भी सवाल उठाए। पार्टी के बागी नेताओं की इन गतिविधियों की खबर ‘अमर उजाला’ में छपने के बाद स्थानीय नेताओं ने इतवार को इसकी जानकारी प्रदेश नेतृत्व को दी। नेताओं ने अखबार में छपी रिपोर्ट भी फैक्स से लखनऊ भेजी।
दो घंटे बाद ही जिला कार्यालय को मिले फैक्स में कहा गया कि प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिले के पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों के पार्टी विरोधी कार्यों में लिप्त होने तथा अनुशासनहीन आचरण को गंभीरता से लिया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिन्हें नोटिस दिया गया, वे पूर्व जिलाध्यक्ष राम मिलन यादव, पूर्व उपाध्यक्ष कुंअर प्रताप सिंह, पूर्व प्रमुख रामधारी यादव और जिला सचिव संदीप त्रिपाठी हैं। जिला प्रवक्ता कालीशंकर को पार्टी से निकाल दिया गया है।
साथ ही युवजन सभा के जिला अध्यक्ष श्याम यादव तथा समाजवादी छात्रसभा के जिला अध्यक्ष मो.आजम लारी को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। इस चिट्ठी पर प्रदेश के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के दस्तखत हैं। प्रदेश नेतृत्व की इस कार्रवाई से पार्टी के नेताओं में दिन भर खलबली मची रही। चर्चा इस बात पर भी होती रही कि बगावत की राह पर खड़े नेता अब कौन सा रास्ता अख्तियार करेंगे।