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गर्भावस्था में खून की कमी ज्यादा, सतर्कता बरतनी जरूरी

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गर्भावस्था में खून की कमी ज्यादा, सतर्कता जरूरी
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गोरखपुर। गर्भावस्था के समय 10-15 प्रतिशत महिलाएं गंभीर जटिलताओं की शिकार हो जाती हैं। ब्लड प्रेशर, पीलिया, झटका, बेहोशी और बुखार की समस्या रहती है। खून की कमी सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में क्रिटिकल केयर की जरूरत पड़ती है। गर्भस्थ महिला के साथ डॉक्टरों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यह जानकारी फेडरेशन ऑफ ओब्सट्रिक्स एंड गायनी सोसायटी ऑफ इंडिया (फॉग्सी) की कार्यशाला में लंदन से आए डॉ. अरुल कुमार ने दी। कहा कि प्रसव में विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
फॉग्सी की तरफ से शुक्रवार को ‘सुरक्षित मातृत्व’ पर होटल रेडिशन ब्लू में तीन दिवसीय (2-4 अगस्त) कार्यशाला हुई। इसका उद्घाटन लंदन से आए डॉ. अरुल कुमार और डॉ. साधना गुप्ता ने किया। गर्भावस्था में क्रिटिकल केयर, फिटल मेडिसिन, लेबर रूम, इमरजेंसी प्रोटोकोल और मेडिको लीगल पर अलग-अलग जानकारी दी। नई दिल्ली से आई डॉ. प्रतिमा मित्तल, डॉ. बबीता शुक्ला और डॉ. मधु गुलाटी ने कहा कि गर्भावस्था में महिलाओं के अंदर खून की कमी बहुत ज्यादा पाई जाती है।
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डॉ. प्रीति कुमार ने गर्भावस्था में झटके की बीमारी और कोमा में चले जाने वाली समस्या बताई। डॉ. ज्योत्सना सूरी ने कहा कि गर्भावस्था में फ्लूइड देने की जरूरत होती है। डॉ. किरण गुलेरिया ने गर्भावस्था में गुर्दे से संबंधित बीमारी और उसकी जांच, इलाज के बारे में बताया। डॉ. अचला बत्रा ने गंभीर रूप से बीमार गर्भवतियों को ऑक्सीजन की जरूरत, महत्व व जरूरत पड़ने पर इसे देने की विधि और गति के बारे में जानकारी दी। डॉ. शांता ने भी विचार रखे।
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प्रसव के बाद ज्यादा रक्तस्राव खतरनाक
डॉ. उमा सिंह, डॉ.आशीष मुखोपाध्याय और डॉ. अलका पांडेय ने कहा कि समय से पहले बच्चेदानी से खेड़ी हटी तो पेट में ही बच्चे की मौत हो जाती है। कभी-कभी रक्तस्राव ज्यादा होता है तो जच्चा-बच्चा को बचाने की चुनौती रहती है। कई बार प्रसव का समय पूरा होता है, फिर भी बच्चे का दर्द नहीं होता। ऐसी स्थिति में कृत्रिम तरीके से दर्द पैदा करना पड़ता है। प्रसव के बाद ज्यादारक्तस्राव गंभीर होता है। इससे मरीज की जान जा सकती है। डॉ. शीला माने, डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. एमसी पटेल और डॉ. संजय दास ने प्रोजेक्टर से सफल ऑपरेशन का वीडियो भी दिखाया।
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