इलाज कराना है तो समझौता करो, वरना...
खुद को चंदू बाबू का कर्मचारी बताने वाले कुछ लोगों ने अरविंद के परिवार पर बनाया दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गैलेंट इस्पात के एमडी चंद्र प्रकाश अग्रवाल उर्फ चंदू बाबू के गार्ड संदीप की गोली से घायल अरविंद चौहान के परिवार पर अब इलाज की कीमत पर सुलह का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि, अभी अरविंद की हालत भी सामान्य नहीं हुई है। यह सूचना मिलने पर शुक्रवार को अमर उजाला ने घरवालों से संपर्क किया तो उन्होंने यह आरोप लगाया। उनका आरोप है कि जब तक मीडिया में खबरें आ रहीं थीं, चंदूबाबू के आदमी चौकस इलाज करा रहे थे, अब उन्हीं का रवैया एकदम बदल गया है। अरविंद के इलाज का हवाला देकर उनसे सादे कागज पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया जा रहा है। इसमें गोरखनाथ थाने में तैनात एक सिपाही भी उनकी मदद कर रहा है।
22 जुलाई से ही अरविंद चौहान अस्पताल में भर्ती है। वह ठीक से ना तो किसी को पहचान पा रहा है और ना ही बातचीत कर पा रहा है। एक आंख गंवा चुके पीड़ित के परिवार ने बताया कि अरविंद उसकी सेहत में कोई ज्यादा सुधार नहीं हो सका है। चाचा सत्येंद्र चौहान ने बताया कि चंदू बाबू के कर्मचारी लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि आगे का इलाज भी तभी कराएंगे जब वह सादे कागज पर हस्ताक्षर करेंगे। इंकार करते ही बृहस्पतिवार की रात दो बजे से कर्मचारी नजर नहीं आए हैं। हालांकि इसकी जानकारी होने पर क्षेत्रीय पार्षद के पति अजय ओझा ने चंदा जुटाकर इलाज का आश्वासन दिया है। मां और बहन ने भी साफ कहा कि अरविंद के ठीक होने के बाद ही वह आगे की कोई कार्रवाई करेंगे। इस संबंध में चंदूबाबू का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष प्राप्त होगा, प्रकाशित किया जाएगा।
लड़ाई लड़ेंगे, जरूरत पड़ी तो चंदा जुटाकर कराएंगे इलाज
पार्षद के पति अजय कुमार ओझा ने कहा कि अरविंद की सेहत अभी ठीक नहीं है। वह अस्पताल में भर्ती है और परिवार पर दबाव बनाए जाने की जानकारी हुई है। वह लड़ाई लड़ेंगे और यदि चंदू बाबू इलाज नहीं कराएंगे तो वह खुद चंदा जुटाकर इलाज करवाएंगे। अरविंद के ठीक होने से पहले इस मामले में किसी तरह की भी बात करना गलत है।
अभी भी सामान्य नहीं हो सका है अरविंद
अरविंद गोरखपुर से रेफर होने के बाद से चार अलग-अलग अस्पताल में भर्ती हुआ था। छठे अस्पताल अपोलो में उसका आपरेशन तो हो गया, लेकिन उसे आंख गंवानी पड़ी। अभी भी वह अस्पताल में ही भर्ती है और नली के माध्यम से ही उसे जूस आदि दिया जा रहा है। परिवारवालों के मुताबिक अरविंद किसी को ठीक से पहचान नहीं पा रहा है। ना ही ठीक से बात कर पा रहा है। सिर्फ इशारों में बातचीत कर पा रहा है। बहन, मां भी घर आ गए हैं। मां ने बताया कि अभी बेटा जिंदगी-मौत से ही जूझ रहा है। कई बार उसे वेंटीलेटर पर रखा गया।
...
ये था मामला
22 जुलाई की शाम गैंलेंट आवास परिसर में क्रिकेट का गेंद चले जाने पर अरविंद पास की बाउंड्री पर चढ़ा था। उसकी मंशा कि कोई आए और वह गेंद मांग ले। इसी बीच गार्ड ने अंदर से गोली मारी दी थी और अरविंद के सिर और आंख में लगी थी। गोली लगने की वजह से उसकी एक आंख खराब हो गई। पुलिस ने इस मामले में गार्ड पर केस दर्ज किया फिर नाटकीेढंग से वह गोरखनाथ थाने में हाजिर हो गया।
कोट:::
परिवार पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया है। कुछ लोग बेवजह ही मामले को तूल देना चाहते हैं। पुलिस मामले की जांच पड़ताल नियमानुसार कर रही है।
प्रवीण सिंह, सीओ गोरखनाथ