इंतजाम सुधारने के लिए दबाव कितना जरूरी है, इसकी बानगी मेडिकल कॉलेज में इन दिनों देखने को मिल रही है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के बाद जो कॉलेज प्रशासन चार सौ से अधिक इंसेफेलाइटिस के मरीजों को उनका कॉलेज नंबर नहीं दे रहा था, उसने उस नंबर के एलॉटमेंट के लिए बाकायदा पुख्ता इंतजाम किया है। इससे मरीजों की मृत्यु होने पर उनके परिवार वालों को मुआवजा मिलना आसान हो जाएगा।
दरअसल हर साल की तरह इस साल भी सैकड़ों ऐसे मरीजों के घर वाले जेई/एईएस नंबर पाने से वंचित रह गए, जिन मरीजों की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही मौत हो गई और वे बिना नंबर एलॉट कराए ही शव लेकर चले गए। बाद में जब वे मुआवजे के लिए जेई/एईएस नंबर पाने की उम्मीद से कॉलेज प्रशासन से मिले तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि अभी पुराना रिकॉर्ड मिलना संभव नहीं। जब ऐसे कई मामले सामने आए तो एक समाजसेवी ने आरटीआई दाखिल कर इन मरीजों का ब्योरा मांग लिया।
जवाब देने के दौरान कॉलेज प्रशासन को इसकी गंभीरता समझ में आई और छूटे मरीजों को नंबर जारी करने के लिए बाकायदा इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंप दी। एसआईसी डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि जेई/एईएस नंबर एलॉट करने का इंतजाम कर दिया गया है। अब किसी भी मरीज के परिजन को दौड़ना नहीं पड़ेगा। इसके लिए एक कर्मचारी को विशेष तौर पर तैनात किया गया है।