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रोहिन नदी पहुंची 1998 के रिकार्ड के करीब

Thu, 17 Aug 2017 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद सामान समेटने में जुटे लोग। - फोटो : Amar Ujala
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रोहिन नदी लगातार 10 दिनों से जहां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है वहीं राप्ती बुधवार की शाम खतरे के निशान से 67 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। इसमें बढ़ाव जारी है। उधर, कुंआनो नदी भी खतरे का निशान पार कर गई है। राहत की बात यह है कि घाघरा नदी का जलस्तर अब घटान पर है। रोहिन की रफ्तार देख लोगों को 1998 की रिकार्डतोड़ बाढ़ याद आने लगी है।
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नेपाल में लगातार हुई बारिश का असर यूं तो जिले में बहने वाली सभी नदियों में देखने को मिल रहा है पर सर्वाधिक असर रोहिन नदी पर पड़ा है। करीब 10 दिन से यह नदी खतरे का निशान पार कर 1998 के रिकार्ड के करीब पहुंच गई है। 1998 में रोहिन नदी का जलस्तर 85.430 पहुंच गया था, जबकि बुधवार की सुबह इसका जलस्तर 85.230 रिका़र्ड किया गया। गोरखपुर जनपद में तटबंध में कई स्थानों पर रिसाव के बाद सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने उसे दुरुस्त करा दिया। इस कारण दवाब के चलते महराजगंज में अनंत बड़हरा और जर्दी डोमरा बांध टूट गया। बाढ़ को देखते हुए विभाग के अलावा प्रशासनिक अधिकारी लगातार तटबंधाें का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

दूसरी तरफ राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 67 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। नौसड़ से सटे बहरामपुर क्षेत्र के निचले इलाके में पानी भर गया है। बैकुंठ धाम में पानी घुसने से लोग सड़क किनारे दाह संस्कार कर रहे हैं। नदी किनारे वाले गांवों के लोग पानी बढ़ने से भयभीत हैं। उतरासोत के सामने सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया ठोकर राप्ती नदी काट रही है। इससे कई गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ खंड 2 के अधिशासी अभियंता रामअवतार सिंह ने बताया कि सभी बांध पूरी तरह से सुरक्षित हैं, जबकि अधीक्षण अभियंता माहेश्वरी प्रसाद का कहना है कि रोहिन नदी के लगातार खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण बंधा कमजोर हो गया हैं। फिर भी गोरखपुर जनपद में बंधे सुरक्षित हैं।
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चार-चार लाख रुपये की मदद मिलेगी बाढ़ बचाव कार्यों के लिए शासन ने जिले को 50 लाख रुपये मुहैया कराए हैं। इस रकम से नावों और राहत शिविरों में खान-पान की व्यवस्था करने के साथ बाढ़ में मरने वालों के पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रुपये की मदद भी दी जाएगी। आपदा विभाग के  मुताबिक जिले में 607 नाव उपलब्ध हैं। इनमें 208 छोटी, 296 मझोली और 103 बड़ी नावें हैं। इसी तरह 86 बाढ़ चौकि यां, 89 राहत केंद्र और 113 राहत शिविर बनाए गए हैं। डीएम ने सभी सक्रिय करने के साथ संबंधित एसडीएम को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पर्याप्त नाव की व्यवस्था के साथ ही वहां के राहत शिविर का निरीक्षण कर जरूरी संसाधन मुहैया करवाने को कहा। आपूर्ति विभाग को शिविरों में खान-पान की व्यवस्था सौंपी गई है तो स्वास्थ्य विभाग को शिविर में रहने वालों के इलाज की। इसी तरह पशुपालन विभाग को जानवरों के इलाज आदि की जिम्मेदारी दी गई है। डीएम ने सभी एसडीएम को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिविरों में किसी तरह की दिक्कत न हो। 
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