नेपाल के साथ आसपास के जिलों में लगातार कई दिनों से हुई बारिश की वजह से रोहिन का जलस्तर खतरे के निशान से पौने तीन मीटर ऊपर पहुंच गया है। जगह-जगह बंधों में रिसाव होने से तटबंध पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अपना घर बचाने के लिए ग्रामीण जूझ रहे हैं। बुधवार की रात आठ बजे बांध नदी का बेग झेल नहीं पाया और कर्महा गांव के पास टूट गया। इससे डरे ग्रामीण सुरक्षित स्थान की ओर भागे। चारों तरफ भगदड़ मच गई। बांध टूटते ही वहां तैनात ड्रेनेज खंड के अभियंता भाग खड़े हुए।
सरहरी प्रतिनिधि के अनुसार बंधे पर जगह-जगह हो रहा रिसाव रोकने के लिए ड्रेनेज खंड के अभियंताओं के साथ ग्रामीण भी जुटे थे। ग्रामीणों की मानें तो विभाग की तरफ से बचाव के लिए सामग्री नहीं मुहैया कराई गई जिससे बांध कट गया। इस बांध के टूटने से सियारामपुर, कुरसौनी, बढ़नी, कुदरिहा, देनडीह, लक्ष्मीपुर, भैसही, अहिरौली , बनरहा आदि कई दर्जन गांव प्रभावित हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे 40 हजार से अधिक आबादी प्रभावित है। हजारों एकड़ फसल के नुकसान का अंदेशा है।
रेग्यूलेटरों में रिसाव से हड़कंप, कई घरों में घुसा पानी
बुधवार तड़के हार्बर्ट बांध के किनारे रहने वालों लोग अपने-अपने घरों से सामान लेकर आस-पास अपने जानने वालों के यहां पहुंचने लगे। हार्बर्ट बांध के रेग्यूलेटर नंबर 2 से अचानक हुए रिसाव की वजह से बांध के किनारे स्थित जफर कालोनी, पिपरापुर आदि इलाका प्रभावित हो गया। थोड़ी देर बाद हार्बर्ट बांध के रेग्यूलेटर 3 और 6 से भी रिसाव शुरू हो गया। जिस वजह से इलाहीबाग का एरिया प्रभावित होने लगा। जफर कॉलोनी की जरीना अपने परिवार के साथ आराम से घर में सो रही थी। आंख खुली तो देखा की घर में काफी तेजी से पानी घुस रहा है। जरीना अपने साथ अपने बच्चों को लेकर पास के ही ऊंचाई पर बने हैदर के घर आ गईं। इलाके की परवीन भी घर में पानी घुसने पर परिवार के साथ हैदर के घर सहारा लेने आईं। इसी तरह बंधे पर ऊंचाई पर बने घरों में बाढ़ पीड़ितों ने शरण लेना शुरू कर दिया। शरण लेने वालों का कहना है कि अपनों की सलामती रहेगी तो फिर आशियाना खड़ा कर लेंगे।
जुगाड़ की नाव से की लोगों की मदद
पिपरापुर के 9 साल के इंताफ ने कई बाढ़ पीड़ितों की मदद की। सुबह लगभग साढ़े तीन-चार बजे यहां के लोगों के घरों में पानी घुसना शुरू हो गया। प्रशासनिक अमला लगभग तीन घंटे बाद पहुंचा। इस दौरान कबाड़ की दुकान में काम करने वाले इंताफ ने जुगाड़ से खराब फ्रिज को नाव की शक्ल दी और बाढ़ में डूबे घरों से सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने लगा। मुहल्ले वालों ने इंताफ के इस प्रयास की खूब सराहना की। लोगों ने कहा कि इंताफ का जुगाड़ बड़ा कारगर निकला।
पानी में आशियाना, बंधे का सहारा
राप्ती में बाढ़ के पानी ने पाई-पाई जोड़कर बनाए गए आशियाने को छोड़कर कई लोगों को हार्बर्ट बंधे पर शरण लेने पर मजबूर कर दिया है। राप्ती के जलस्तर से साथ ही लोगों की धड़कनेें भी बढ़ती जा रही है। लोग रात में बारी-बारी से जागकर पहरा दे रहे हैं और अन्य लोगों को आगाह कर रहे हैं। बुधवार को दिन में कई घरों में पानी घुसने से लोग सामान बचाने की जुगत में लगे दिखे। बहरामपुर दक्षिणी निवासी रिटायर्ड शिक्षक की पत्नी अनिता देवी ने बताया कि घर के बेसमेंट में पहले ही पानी भर गया था। बुधवार को ग्राउंड फ्लोर भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया। बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। विशाल ने बताया कि बंधे से 100 मीटर की दूरी पर घर है। आसपास का पूरा इलाका पानी की चपेट में हैं। राशन और जरूरी सामान लाने के लिए बंधे पर चार दिन से झोपड़ी डालकर रह रहा हूं। नाव की मदद से जरूरी चीजें घर की छत पर टेंट डालकर रह रहे परिवार के लोगों तक पहुंचा रहा हूं। जलस्तर और बढ़ा तो सांसत बढ़ जाएगी। शिवकलेश, अशोक और सिंगारमती ने बताया कि चार दिन से बंधे पर रह रहे हैं। दिन में तो जैसे तैसे गुजर बसर हो जाती है, रात में अंधेरे में सांप के साथ कीड़े मकौड़ों का डर बना रहता है। शासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है।
पुख्ता इंतजाम न हुआ तो नहीं संभलेंगे हालात
बहरामपुर के लोगों पर बाढ़ आफत बनकर टूटी है। पांच दिनों में 50 से ज्यादा लोग बेेघर हो चुके हैं। राप्ती नदी के किनारे रास्ते पर चूल्हा जलाकर खाना पकाया जा रहा है। सामान और मवेशी सड़कों पर हैं। हालात बेकाबू है, लेकिन प्रशासन इससे बेखबर है। अगर समय रहते बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम न किए गए तो हालात संभाले नहीं संभलेंगे। बहरामपुर गांव में नाव से लोगों को घर पहुंचाया जा रहा था। क्षेत्र का सरकारी प्राथमिक विद्यालय जलमग्न था। महिलाएं रास्ते पर खाना बनाते मिलीं। जगह-जगह ईंट के चूल्हे बने दिखे। कुछ लोग छत पर खाना बनाते नजर आए। पानी से घिरे लोग प्रशासन को कोस रहे थे। बहरामपुर के एक एकड़ हिस्से में पांच से छह फीट पानी भरा होने से कई परिवार पांच दिनों से घर से बाहर हैं। कई लोगों ने झुग्गियों का सहारा लिया है। गांव में अच्छे लाल और सुमित परिवार के लिए रास्ते में लिट्टी बनाते नजर आए। उन्होंने बताया कि वे पांच दिनों से घर से बाहर हैं। नहाने, खाना पकाने, पीने के लिए मात्र एक ही हैंडपंप से काम चलाया जा रहा है। बाढ़ अलर्ट की जानकारी देने के लिए बनाई बाढ़ चौकी खंडहर बन चुकी है। बचाव कार्य के लिए रखी गई चार नावें बेकार पड़ी हैं। इसी तरह से लाल डिग्गी में हनुमान मंदिर, हार्बर्ट स्थित शिव मंदिर पानी में डूबा मिला।
फोटो खींचकर चले जा रहे अफसर
अधिकारी क्षेत्र का जायजा लेकर, फोटो खींचकर चले जा रहे हैं, लेकिन कोई कुछ कर नहीं रहा। हम लोग पांच दिन से सड़क पर रहने को मजबूर हैं।
- दीपा गौड़, बहरामपुर
बाढ़ से नास हुआ घरेलू सामान
बाढ़ के चलते बेड, कुर्सी, बिस्तर, टीवी व पंखा आदि सब कुछ खराब हो गया। रहने को जगह तक नहीं बची है पर कोई खैर-खबर लेने नहीं आ रहा।
- विमला देवी, बहरामपुर
कई लोग मकान खाली कर चले गए
क्षेत्र में लगातार पानी बढ़ रहा है। छह दिन से शिव मंदिर डूबा हुआ है। आसपास रहने वाले कई लोग सामान लेकर मकान खाली करके चले गए हैं।
- राहुल, खसेयारी, हार्वर्ट बंधा