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ओवरलोड हैं रोडवेज के चालक, बसें भी खटारा

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रेलवे बस स्टेशन से चल रहे विने वाइपर के बस ।
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रोडवेज के चालक ‘ओवरलोड’, बसें भी खटारा
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गोरखपुर। परिवहन निगम के गोरखपुर परिक्षेत्र में भी चालकों पर काम के बोझ की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। सबसे ज्यादा दिक्कत लंबे रूटों पर चलने वाले चालकों को होती है। आठ घंटे से अधिक लंबे रूटों पर दो चालकों का प्रावधान है मगर कई बसों को मंजिल तक पहुंचाने का भार एक ही चालक पर है। ऐसे में नींद नहीं पूरी होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। सोमवार को यमुना एक्सप्रेस वे पर हुई घटना से यहां के भी चालक सहमे हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ चालकों का कहना है कि गाड़ी चलाते वक्त हर कोई सावधानी बरतता है मगर लंबा सफर तय करने के दौरान कभी-कभी नींद नहीं पूरी होती। ऐसे में अनहोनी का डर बना रहता है।
रोडवेज बसों की सेहत सही न होना भी घटना की वजह बनता है। बरसात के मौसम में भी कई बसों की लाइटें और वाइपर खराब हैं। चालकों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे। गोरखपुर परिक्षेत्र में 734 बसें संचालित हो रही हैं । 418 स्थायी और 592 चालक संविदा पर तैनात हैं। रोडवेज सूत्रोें केे मुताबिक करीब 100 चालकों की कमी अब भी है। रोडवेज प्रशासन समय-समय पर मेला लगाकर संविदा चालकों की भर्ती करता है मगर मानदेय कम होने के साथ ही डीजल के खर्च के बराबर भी कमाई न हो पाने पर उलटे उनसे वसूली हो जाती है। यही वजह है कि एक तरफ कुछ चालकों की भर्ती होती है तो कई नौकरी छोड़ते रहते हैं। राप्तीनगर डिपो 17 जुलाई को फिर संविदा चालकों की भर्ती करने जा रहा है। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है बावजूद इसके आवेदन कम ही आ रहे हैं।
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गोरखपुर परिक्षेत्र की ज्यादातर बसें आठ घंटे से कम दूरी वाले रूट पर चलतीं हैं। सिर्फ दिल्ली और मथुरा रूट ही आठ घंटे से अधिक का है। दिल्ली के लिए 18 और मथुरा के लिए दो बसें संचालित होती हैं। दोनों रूटों के बसों पर दो-दो चालक रहते हैैं। एक के थकने पर दूसरा गाड़ी चलाता है। चालकों की थोड़ी कमी है लेकिन भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया है- मुकेश कुमार, एआरएम
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