डॉक्टर रामशरण के मुताबिक प्रणव को नशे की आदत थी। उसके चाचा से मेरा परिचय है। चाचा ने ही क्लीनिक पर भेजा था। इलाज करने के दौरान ही वह ज्यादा संपर्क में आ गया और उस पर भरोसा करने लगे थे।
मृतक आश्रित कोटे से पाए थे नौकरी
शिव प्रकाश सिंह 2011 बैच का दरोगा है। वाराणसी निवासी शिव प्रकाश को मृतक आश्रित कोटा से ही नौकरी मिली थी। इसके पहले भी उसके खिलाफ कई शिकायतें आई थी लेकिन सबूत ना होने की वजह से बच जाता था।
स्पीड पोस्ट की बात झूठी
शुरुआती जांच में एक तथ्य यह भी सामने आया था कि स्पीड पोस्ट से ज्योति ने शिकायत की है। जबकि इंस्पेक्टर राजघाट का कहना है कि थाने में इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई थी।
हैंडराइटिंग की भी करा सकते है जांच
चौकी इंचार्ज ने तहरीर खुद लिखी या फिर कथित पत्रकार ने तैयार की थी। इसकी भी जांच कराए जाने की तैयारी है। पुलिस ने दरोगा के पास से उस तहरीर को बरामद करने के लिए जांच तेज कर दी है। इसके लिए दरोगा से पूछताछ करने की तैयारी है।
डॉक्टर के पास जब चौकी इंचार्ज का फोन आया और दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप का मामला सामने आया तो वह खुद भी डर गए। बदनामी से बचने के लिए ही उन्होंने कोशिश जारी कि और फिर बीच में आए प्रणव की मदद से मुलाकात हुई। चौकी इंचार्ज ने तब कहा कि पांच लाख लड़की को देना है और पांच लाख रुपये में कई अफसर भी शामिल है। तत्काल रुपये चाहिए। शुरुआत दस लाख से हुई थी लेकिन बाद में आठ लाख में सौदा तय हो गया। आठ लाख लेने के बाद फिर दो लाख और लेने की कोशिश शुरू कर दी गई। डॉक्टर बताते हैं कि वह बदनामी से इतना डर गए थे कि आईएमए को भी कुछ नहीं बताना चाहते थे लेकिन रुपये देने के बाद फिर जब दोबारा रुपये मांगे गए तो उन्होंने अध्यक्ष से संपर्क किया।
डॉक्टर से वसूली के लिए ज्योति सिंह के नाम से काल्पनिक प्रार्थना पत्र तैयार किया गया होगा। अभी तक ज्योति नाम की कोई महिला सामने नहीं आई है। जांच जारी है, जल्द ही ज्योति की गुत्थी को भी सुलझा लिया जाएगा। -विनय कुमार सिंह, एसपी सिटी
ऐसे उलझता गया मामला
-15 मई को फोन आने पर डॉक्टर ट्रांसपोर्ट नगर चौकी पर पहुंचे थे
-चौकी पर प्रार्थना पत्र में टाइटिल देखकर डॉक्टर चौंक गए थे
-करीबी प्रणव पर भरोसा और फिर रुपये के लिए बढ़ते दबाव से शक हुआ
-क्लीनिक पर भटकते हुए दरोगा का आना और फिर सीसी टीवी कैमरे को तोड़ने की कोशिश
-पूरी घटना सीसी टीवी कैमरा में रिकॉर्ड होने पर प्रणव ने ही चौकी इंचार्ज को इसकी जानकारी दी थी
ऐसी घटनाएं खाकी के विश्वास को तोड़ती हैं: आईएमए
पुलिस अगर सीधे साधे लोगों के साथ ऐसा करेगी तो उनकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी। सभी नहीं लेकिन एक दो पुलिस वालों से पूरा महकमा शर्मिंदा होता है। आईएमए के अध्यक्ष एपी गुप्ता ने कहा कि पुलिस का काम संवैधानिक तरीके से सुरक्षा देना है। इस तरह की घटनाएं समाज के लिए शर्मिंदगी की बात है। अध्यक्ष ने कहा कि एक सोची समझी साजिश के तहत डॉक्टर को फंसाया गया उनसे रुपये भी वसूले गए। इस घटना पर त्वरित कार्रवाई से ऐसी मंशा वालों को सबक मिला होगा। आईएमए इस घटना का निंदा करता है।