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खोखला साबित हुआ रेल और आम बजट 

Thu, 02 Feb 2017 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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budget - फोटो : amar ujala
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रेल और आम बजट में हुई घोषणाओं से आम लोगों ने ज्यादा राहत नहीं महसूस नहीं की है। हालांकि, बजट के कुछ प्रावधानों को लोगों ने सराहा, मगर इसके विपक्ष में भी लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलीं। लोगों से बातचीत में बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई।
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राजेंद्र नगर निवासी प्रवीण दुबे का कहना था कि छह हजार रुपये नकदी देने का मामला बड़ा ही संगीन है। इस बात को कौन सुनिश्चित करेगा, कि यह राशि उचित महिलाओं तक पहुंच सकेगी और गरीब व्यक्ति इसका लाभ लेने के लिए प्रक्रियाओं को पूरा करेगा या पत्नी का इलाज करवाएगा। रुस्तमपुर निवासी त्वरिता पांडेय ने गर्भवती महिलाओं को 6 हजार रुपये देेने की घोषणा पर खुशी जताई है। उनका कहना था कि रकम न होने की वजह से बेटियों को बोझ ही समझा जाता था, अगर घोषणा के  मुताबिक रकम मिली तो गरीब बच्चियों को जन्म देने में बोझ महसूस नहीं करेंगे। विकासनगर, बरगदवा निवासी डॉ. पूजा श्रीवास्तव रेल संरक्षका फंड बढ़ाने की बात पर नाराज दिखीं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले में कानपुर से यशवंतपुर ट्रेन से गोरखपुर आ रही थी कि बाराबंकी स्टेशन पर उनका पर्स चोरी हो गया। पर्स में दो मोबाइल, आईडी, जरूरी दस्तावेज सहित रुपये थे। स्लीपर कोच पर लिखे सिक्योरिटी नंबर पर फोन किया, लेकिन नंबर ही नहीं लगा।

सिविल लाइन, बिलंद पुर निवासी डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव ने आनलाइन रेल टिकट पर सर्विस चार्ज नहीं काटने पर खुशी जताई है और कहा कि स्टेशन में लगने वाली लंबी कतारें खत्म होंगी। एजेंटों का काम बढ़ेगा और लोग भी अधिक से अधिक आनलाइन प्रक्रिया से जुड़ेंगे। धर्मशाला निवासी विक्की कुकरेजा ने 2019 तक 1 करोड़ लोगों को पक्के मकान देने की घोषणा को गुमराह करना बताया है। उन्होंने कहा कि एक लाख लोगों को ही पक्के मकान मिल जाए, तो भी बहुत बड़ी बात होगी। अभिमन्यु जायसवाल रेल बजट से नाखुश दिखे। उन्होंने पैंट्री में खाने की कीमतों पर सवाल उठाए और ट्रेनों में बायो टॉयलेट को पब्लिक के किसी काम का नहीं बताया।  बजट में किसान को पर्याप्त सुविधा नहीं बुधवार को पेश किए गए बजट को किसानों ने नाकाफी बताया है। उनका कहना है कि सरकार ने किसानों की कोई खास चिंता नहीं की है। जो भी उसके हित में किया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। हरपुर बुदहट के देवरिया गांव निवासी प्रगतिशील किसान बृजकिशोर राय बजट को ठीक बताया, पर कहा कि इससे किसानों की माली हालत सुधरने वाली नहीं है। किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहे हैं। इस नाते किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए। किसानों को जो सब्सिडी दी जा रही है वह भी पर्याप्त नहीं है। इन समस्याओं की ओर जब तक सरकार ध्यान नहीं देगी, किसानों का हित नहीं हो सकता।
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बेलघाट ब्लॉक के मड़हा गांव निवासी राजेश सिंह कहते हैं कि सरकार ने बजट में ऐसा कुछ नहीं किया जिससे किसानों को राहत मिले। फसल बीमा सुरक्षा 50 प्रतिशत या 100 मिट्टी परीक्षण अनुसंधान केंद्र से राहत नहीं मिलने वाली। किसानों को उनके ऊपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए। डाई, यूरिया और पोटास के दाम सरकार आधा करे। देवरिया जिले के रामपुर कारखाना ब्लॉक के देशही देवरिया गांव निवासी भोला छोटे किसान हैं। बजट के बारे में वह कहते हैं कि सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। हर किसान को मुफ्त बिजली, पानी मिलनी चाहिए। कर्ज भी पूरी तरह माफ किया जाना चाहिए। यदि सरकार उद्योगपतियों के करोड़ों माफ कर सकती है तो किसानों का हजार और लाख क्यों नहीं। किसान कड़ी मेहनत करता है उसके बाद भी मुफलिसी में जीवन यापन करता है इसका एहसास किसी को नहीं है।
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