रामलीला के मंच ने दिलाई रंगकर्मियों को देश-विदेश में पहचान
लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले डॉ. पुनीत बना चुके हैं चार बार विश्व रिकॉर्ड
डॉ. अमित ईडीआई के प्रोग्राम डायरेक्टर तो शिवकुमार ब्राजील में हैं वैज्ञानिक
इस रामलीला में वर्ष 1840 से अब तक आए हैैं कई बदलाव
सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है यह रामलीला
भोजपुरी भाषा में हुई थी रामलीला मंचन की शुरुआत
राकेश कुमार गौंड़
पडरौना (कुशीनगर)। ज्यादातर रामलीला, रासलीला या रंगमंच के कर्मियों की जिंदगी इस मंच से शुरू होती है और यहीं तक सिमटकर रह जाती है, लेकिन जिले के कसया क्षेत्र के मठिया माधोपुर में 179 वर्षों से आयोजित हो रही रामलीला एक अपवाद है। यहां की रामलीला के कई पात्र विदेशों तक अपनी पहचान बचा चुके हैं। लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले डॉ. पुनीत द्विवेदी ने तो विभिन्न क्षेत्रों में चार बार विश्व रिकॉर्ड बनाया है। 1980 में अंग्रेजी हुकूमत के दौर से लेकर अब तक इस रामलीला में कई बदलाव आए। यह रामलीला सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल कही जाती है।
खेल मैदान से शुरू होकर मंच तक पहुंची रामलीला
यहां डॉ. इंद्रजीत मिश्र सहित अन्य लोग बताते हैं कि कार्तिक पंचमी को हनुमान चबूतरा तैयार होने के बाद रामचरित मानस का पाठ शुरू हुआ। मानस पाठ करने वाले ग्रामीणों ने वर्ष 1839 में पहली बार रामलीला का मंचन भोजपुरी में किया। वर्ष 1840 में रामलीला का आयोजन शुरू हो गया। दो एकड़ क्षेत्रफल में रामलीला होती थी, जहां अब मेला लगता है। उस समय लोगों को न तो खड़ी बोली आती थी और न ही वे हिन्दी जानते थे। गांव में पढ़े-लिखे लोगों की संख्या गिनी चुनी ही थी।
अयोध्या मिश्र ने डाली थी नींव
72 वर्षीय डॉ. इंद्रजीत मिश्र और 65 वर्षीय पंडित नंदकिशोर दूबे की मानें तो अयोध्या से रामलीला देख गांव लौटे पंडित अयोध्या मिश्र ने श्रीरामचरित मानस का पाठ शुरू कराया था, लेकिन खिचड़ी बाबा उर्फ सुुरजन मिश्र ने रामलीला कराना शुरू किया।
न जाति का बंधन न सांप्रदायिक भेदभाव
यहां न जाति का बंधन है और न ही सांप्रदायिक भेदभाव। रामलीला के आयोजन में सबकी भागीदारी तय है। बांसफोड़ समाज के लोग रावण के पुतले के लिए बातियां बनाते हैं तो मुसलमान कलाकार उसे मूर्त रूप देते हैं। राम-सीता विवाह में मुसलमानों की भागीदारी भी है। भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए हल्दी भेजकर लोगों को न्योता देना इसे अलग पहचान दिलाता है।
रामलीला के पात्र बना चुके हैं विश्व पटल पर पहचान
इस रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले डॉ. पुनीत द्विवेदी की देखरेख में 12 सदस्यीय टीम ने अभी सितंबर में ही इंदौर में जेनरिक मानव कैप्सूल बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा वर्ष 2014 में सबसे बड़ी पेपर चेन, 2014 में लार्जेस्ट बैकवर्ड्स वॉक और वर्ष 2014 में लार्जेस्ट ह्यूमन चेन बनाकर न केवल विश्व रिकार्ड बनाया, बल्कि गिनीज बुक में भी इन रिकॉर्ड को दर्ज कराया।
इस रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमित द्विवेदी भारतीय उद्यमिता संस्थान (ईडीआई) अहमदाबाद में प्रोग्राम डायरेक्टर हैं। इन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय से आए अधिकारियों को देश की अर्थव्यवस्था संभालने का गुर सिखा चुके हैं। इसके अलावा स्टार्टअप प्रोग्राम को भी इन्होंने ही तैयार किया था, जिसे भारत सरकार ने लागू किया है।
डॉ. अमित द्विवेदी के जाने के बाद रामलीला में राम की भूमिका निभाने वाले शिवकुमार सिंह भौतिकी से वैज्ञानिक हैं और ब्राजील में कार्यरत हैं। इससे पहले जापान में थे।
शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन 101 कन्याओं का हुआ पूजन
पिपरा बाजार। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन विशुनपुरा ब्लॉक के सिरसिया दीक्षित गांव में 101 कन्याओं का पूजन किया गया। गांव के शिवाला टोला के शिव मंदिर में पूजा के बाद कन्याओं को फलाहार कराया गया।
गांव के अश्विनी कुमार पांडेय के मुताबिक विगत आठ वर्षों से शिव मंदिर और दुर्गा पूजा समिति नवरात्र में नवमी तिथि को 101 कन्याओं की पूजा का आयोजन करती है। कन्याओं के चयन में कोई भेदभाव नहीं किया जाता। सोमवार को भी पहले से चली आ रही परंपरा का निवर्हन करते हुए कन्या पूजन किया गया। गांव के विमलेश पांडेय ने पूजा के दौरान कन्याओं को शक्ति की देवी दुर्गा के विषय में विस्तार से बताया। पूजा के बाद आयोजन समिति की ओर से कन्याओं को फलाहार कराया गया। कार्यक्रम में शिवपूजन, विनोद दीक्षित, चंद्रशेखर मिश्र, रूदल यादव सहित बहुत से लोगों की सहभागिता रही।