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10 स्कूलों में वाणिज्य कर का छापा, नोटिस

Wed, 12 Apr 2017 01:19 AM IST
राजीव रंजन, अमर उजाला, गोरखपुर।
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स्कूली बच्चे
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वाणिज्य कर टीम की लगातार छापेमारी के बाद भी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। स्कूल न सिर्फ मनमाने दाम पर प्रॉस्पेक्टस बेच रहे हैं, बल्कि स्कूलों को दुकान के रूप में भी तब्दील कर दिया है। गोरखपुर के अलावा सिद्धार्थनगर, बस्ती, कुशीनगर में वाणिज्य कर की जांच में कुछ ऐसी ही गड़बड़ी मिली है। इन सभी स्कूलों को नोटिस दिया गया है। वाणिज्य कर टीम ने मंगलवार को जिले के 10 स्कूलों में छापेमारी की।
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गोरखपुर के सेंट टेरेसा स्कूल ने बच्चों को बेल्ट और डायरी दी, लेकिन विनायक ट्रेडर्स और अमन ट्रेडर्स से कॉपी, किताब और स्टेशनरी के माध्यम से कॉपी, किताब और स्टेशनरी बिकवाते हुए पकड़ा गया। गोरखनाथ क्षेत्र का हेरिटेज स्कूल को खुद ही प्रॉस्पेक्टस बेचते हुए पकड़ा गया। वहीं बक्शीपुर के राजकमल बुक डिपो के मार्फत कॉपी, किताब और स्टेशनरी की बिक्री कराई जा रही है। गोरखपुर पब्लिक स्कूल रुस्तमपुर में कोई अनियमितता नही मिली।

क्वीन मेरी कान्वेंट स्कूल बगहा गोरखपुर की जांच में टीम को कई अनियमितताएं मिली। स्कूल प्रशासन खुद ही यूनीफार्म, कॉपी, किताब और स्टेशनरी बेच रहे थे। इतने सामानों की बिक्री के बाद भी वाणिज्य कर टीम को कोई टैक्स नहीं दिया। आत्मदीप स्कूल ने तो कमाने के लिए एक और धंधा अपना रखा था। विद्यालय प्रशासन द्वारा स्कूल में कैंटीन भी चलाई जा रही थी। इसके साथ ही डायरी और बेल्ट तो बेच रहे थे। गोरखनाथ क्षेत्र का स्टेपिंग स्टोन कॉलेज न सिर्फ कॉपी किताब बल्कि दिल्ली से डायरी मंगाकर बेच रहे हैं। वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर आरके कुरील ने कहा कि इन सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।  
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इन स्कूलों को हुई जांच 
गोरखपुर में सेंट टेरेसा, हैरिटेज स्कूल, क्वीन मेरी कान्वेंट स्कूल, आत्मदीप स्कूल, गोरखपुर पब्लिक स्कूल, स्टेपिंग स्टोन इंटर कॉलेज ग्रीन सिटी, दुबौलिया बस्ती में एडी एकेडमी, आरके पब्लिक स्कूल कुशीनगर प्रास्पेक्टस बेच स्कूल मालामाल, अभिभावक बेहाल पब्लिक स्कूल न सिर्फ अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं बल्कि हर साल लाखों रुपये की टैक्स चोरी भी कर रहे हैं। नियमानुसार ऐसे सभी संस्थानों को किसी भी तरह का व्यापार करने पर पांच प्रतिशत टैक्स देना होता है, लेकिन किसी भी स्कूल से यह टैक्स अदा नहीं किया जा रहा है।

गोरखपुर जिले में 537 और शहर में करीब 100 पब्लिक स्कूल हैं। इन स्कूलों ने कमाने के लिए तरह-तरह का हथकंडा अपना रखा है। खुद ही कॉपी, किताब, स्टेशनरी और यूनिफार्म बेचकर लाखों रुपये कमाते हैं या फिर कमीशन के आधार पर दुकानों से धंधा करते हैं। इनके अलावा स्कूूलों के लिए सबसे कमाऊ धंधा तो प्रास्पेक्टस बेचने का है। 200 रुपये से लेकर 700 रुपये में फार्म बेचकर ये स्कूूल लाखों रुपये कमा रहे हैं। वाणिज्य कर विभाग की जांच में इसका खुलासा भी हो चुका है। वाणिज्य कर विभाग की जांच के अनुसार शहर के नामी स्कूल में 4500 विद्यार्थी पढ़ते हैं और प्रति छात्र 700 रुपये सिर्फ प्रास्पेक्टस के लिए लिया जाता है। यानी हर साल यह स्कूल करीब 30 लाख रुपये से ज्यादा प्रास्पेक्टस बेचकर कमा रहा है। कुछ इसी तरह की स्थिति पिलर्स, जीएन समेत शहर के प्रमुख स्कूलों की है।

स्कूलों को ऐसे होती है कमाई
स्कूल                             छात्र संख्या    प्रास्पेक्टस की कीमत        कुल आमदनी
लिटिल फ्लवार स्कूल      4500              700                        3150000
पिलर्स स्कूूल                    1900                700                        1330000
सेंट जोसेफ                      1800                200                        360000
सेक्रेेट हर्ट                         1500                200                        300000
स्टेपिंग स्टोन                     1000                300                        300000

‘सभी स्कूल प्रास्पेक्टस बेचकर लाखों रुपये कमाते हैं, लेकिन वाणिज्य कर विभाग को कोई टैक्स नहीं देते। नियमानुसार 5 प्रतिशत टैक्स देना होता है। टैक्स न देने पर इन सभी से बकाया टैक्स वसूलने के अलावा पेनाल्टी भी लगाई जाएगी। पेनाल्टी 100 से 200 प्रतिशत तक हो सकती है।’
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आरके कुरील, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग
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