पैसे की चाहत ने इंसान को किस कदर हैवान बना दिया है, इसकी बानगी बुधवार को पूर्वांचल नाट्य महोत्सव के तीसरे दिन मंच से दिखी। सांस्कृतिक संगम के नाटक ‘किस्सा अजनबी लाश का’ की प्रस्तुति में समाज के विद्रुप हो रहे चेहरे की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि आखिर हमारा समाज किस ओर जा रहा है।
अभियान थिएटर ग्रुप एवं संस्कृति विभाग भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव के तीसरे दिन रैंपस स्कूल के मंच पर एक लावारिश लाश को लेकर विवाद की स्थिति बनती है। दो जमींदारों के इलाके की सीमा पर मिली लाश को पहले तो कोई भी अपनाने का तैयार नहीं होता।
लेकिन जैसे ही पता चलता है कि जो लाख का अंतिम संस्कार करेगा, उसे 50 लाख मिलेंगे। जमींदारों का दोनों ही पक्ष विवाद के स्तर पर लाश का दावेदार हो जाता है। यहां तक कि जिस लाश को थोड़ी ही देर पहले कोई अपनाने का तैयार नहीं होता, उसे दोनों पक्ष महापुरुष बताने लगते हैं और रेशम की धोती और चंदन की लकड़ी से अंतिम संस्कार की जरूरत बताते हैं।
लेकिन बात तब फिर पलट जाती है जब दोनों ही जमींदारों को पता चलता है कि लाश से जुड़ा 50 हजार का मामला झूठा है। समाज को आइना दिखाने वाले इस नाटक को जीवंत बनाने में मानवेंद्र त्रिपाठी, आदित्य सिंह, नवनीत जायसवाल, कुश कुमार सिंह, पीयूष राज, प्रभात आनंद, शुभम कुमार, अमित कुमार राय, अखिलेश कश्यप और अभिषेक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मानवेंद्र त्रिपाठी के निर्देशन में मंचित इस नाटक में मंच सज्जा की जिम्मेदारी प्रभात, सुमित, अमित और शुभम ने निभाई जबकि मेकअप राधेश्याम जी का रहा। आगंतुकों का स्वागत आयोजन समिति के संयोजक श्रीनारायण पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन प्रेमचंद श्रीवास्तव का रहा।
व्यवस्था विरोध दिखाएगा नाटक ‘हवालात’
पूर्वांचल नाट्य महोत्सव के चौथे दिन रैंपस स्कूल के मंच पर रंग मंडल के नाटक ‘हवालात’ का मंचन होगा। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना द्वारा लिखित इस नाटक में हवालात में व्यवस्था विरोध को दिखाया जाएगा और इसके माध्यम से देश के वर्तमान हालात को मंच पर उकेरने की कोशिश की जाएगी। नाटक का निर्देशन अजीत प्रताप सिंह का होगा।