सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांसगांव में आशाओं ने पल्स पोलियो अभियान नहीं चलने दिया।
- फोटो : Amar Ujala
आशा वर्करों के आंदोलन का असर पल्स पोलियो अभियान पर भी पड़ा है। कई जगहों पर आशा वर्करों ने सीएचसी और पीएचसी पर प्रदर्शन कर ताला लगा दिया। हालांकि शहर के कई क्षेत्रों में बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई गई।
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की शुरूआत रविवार को महिला अस्पताल में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर ने बच्चों को पोलिया ड्रॉप पिलाकर की। इसके तहत सात लाख 16 हजार 253 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 2226 बूथ पर छह हजार कर्मचारी लगाए गए थे मगर आशा वर्करों के आंदोलन के चलते स्वास्थ्य महकमे का यह इंतजाम धरा का धरा रह गया।
शनिवार की रात से धरना-प्रदर्शन कर रहीं आशा वर्करों ने रविवार को तड़के सीएचसी व पीएचसी में ताला लगाकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जानकारी पर चरगांवा पीएचसी पर प्रशासनिक अधिकारी समझाने पहुंचे मगर कोई असर नहीं हुआ। बाद में वैक्सीन लेने पहुंचे कर्मचारियों के साथ आशा वर्करों की नोकझोंक भी हुई। सीएमओ डा. रवींद्र कुमार ने बताया कि शहरी क्षेत्र में एक लाख 20 हजार 999 बच्चों को पोलियो की खुराक दी गई।
30 तक चलेगा अभियान
डोर टू डोर पोलियो की खुराक पिलाने का अभियान 26 से 30 सितंबर तक चलेगा, मगर आशा वर्करों के आंदोलन के चलते अभियान का प्रभावित होना तय है।
स्कूल तो खुले पर नहीं पहुंची पोलियो वैक्सीन
पल्स पोलियो अभियान पहले ही दिन लड़खड़ा गया। बीएसए के निर्देश पर स्कूल तो खुले लेकिन पोलियो का वैक्सीन ही नहीं पहुुंची। काफी देर इंतजार करने के बाद शिक्षक लौट गए।आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल के चलते रविवार को पल्स पोलियो महाअभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। बहुत से स्कूलों पर शिक्षक सुबह आठ बजे पहुंच गए, लेकिन वैक्सीन ही नहीं पहुंची। काफी देर इंतजार करने के बाद शिक्षकों ने स्कूल बंद कर दिया और लौट गए।