बिजलीकर्मियों का कार्य बहिष्कार, बंद रहे काउंटर
गोरखपुर। भविष्य निधि कोष की रकम के घोटाले के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की तरफ से 13वें दिन सोमवार को भी मोहद्दीपुर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन कर विरोध जताया गया। इस दौरान शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के उपकेंद्रों के काउंटर बंद रहे। बिलिंग संबंधी काम नहीं हो सका। एक अनुमान के मुताबिक सोमवार को गोरखपुर जोन में कुल साढ़े चार लाख रुपये राजस्व की क्षति हुई।
कर्मचारी नेता पारसनाथ उपाध्याय ने कहा कि सरकार को हमारी पीड़ा समझते हुए तत्काल नोटिफि केशन जारी करना चाहिए ताकि सभी कर्मचारी काम पर वापस लौट सकें। अधीक्षण अभियंता व कर्मचारी नेता अनुपम खरे ने बताया कि सरकार सिर्फ विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है । सरकारी नुमाइंदों पर रहम किया जा रहा है जबकि घोटाले में मुख्य जिम्मेदारी सरकारी नुमाइंदों की है। कर्मचारी नेता इंद्र देव त्रिपाठी ने कहा कि सरकार दोतरफा रवैया अपना रही है। इसलिए संगठन को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद रखनी है। कर्मचारी नेता बालेंदु श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक हमारे धन के वापसी की गारंटी नहीं मिल जाती, लड़ाई जारी रहेगी। कर्मचारी नेता बृजेश त्रिपाठी ने कहा कि सीमित संसाधनों एवं सीमित कर्मचारियों के बावजूद सरकार विभिन्न योजनाएं ला रही है। जिसे सभी कर्मचारी मिलकर पूरा कर रहे हैं लेकिन हमारी गाढ़ी कमाई घोटालेबाजों से वापस करवाने में हीला हवाली कर रही है। कहा कि सरकार की इस नीति के खिलाफ फैसला आने तक लड़ाई जारी रखेंगे। इस दौरान कृष्ण मोहन यादव, अखिलेश गुप्ता, रामअवतार यादव, दिनेश पांडेय, डीपी जोशी, यूसी वर्मा, सीबी उपाध्याय, संजू देवी, विनय यादव, सुनील गौड़, दुर्गेश पटेल, अनूप मिश्रा, राहुल शर्मा, सरोजिनी सिंह आदि मौजूद रहे।
नहीं जमा हुआ बिजली का बिल
हड़ताल की वजह से सभी बिलिंग काउंटर बंद रहे। अलहदादपुर के मोहित टाउनहाउल उपकेंद्र पर बिल जमा करने गए थे। लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौट आया। कहा कि कर्मचारियों और सरकार के बीच की लड़ाई में आम जनता पिस रही है।
शर्मा गुट ने भी दिया समर्थन
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के मारकंडेय सिंह सोमवार को साथियों के साथ मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचे और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को समर्थन दिया। कहा कि वर्तमान सरकार सभी विभागों को कमजोर कर निजीकरण की तरफ धकेल रही है।
प्रमुख मांगे
जीपीएफ /सीपीएफ के भुगतान का उत्तरदायित्व सरकार ले और उसका गजट नोटिफि केशन जारी करें।
घोटाले के दोषी आईएएस अधिकारियों को बर्खास्त कर उन्हें गिरफ्तार करें।
जीपीएफ /सीपीएफ निवेश के संबंध में प्रदेश सरकार श्वेत पत्र जारी करे।