राज्य की सभी यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती में आरक्षण को लेकर पिछले दिनों जारी शासनादेश के खिलाफ आरक्षित वर्ग के छात्रोें के विरोध का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को एससी, एसटी और ओबीसी के नेट व पीएचडी धारक अभ्यर्थी जुलूस की शक्ल में कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और वहां चेतावनी धरना दिया। साथ ही हक मिलने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।
छात्र आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित धरना सभा को संबोधित करते हुए संजय यादव ने कहा कि शासन की ओर से 19 फरवरी को जारी आरक्षण नियमों से आरक्षित वर्ग का हक छीनने का प्रयास किया जा रहा है। नया नियम 1994 के उस ओबीसी, एससी व एसटी आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर रहा है, जिसके मुताबिक रोस्टर के तहत पहली सीट एससी व तीसरी सीट ओबीसी के लिए होनी चाहिए।
नए शासनादेश के पालन से 50 प्रतिशत आरक्षण का नियम भी खंडित हो रहा है। शोध छात्र राकेश कुमार ने कहा कि नया शासनादेश न केवल उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर रहा है बल्कि इससे संविधान का भी उल्लंघन हो रहा है। छात्र नेता अमर पासवान ने शासनादेश को आरक्षण की मूल भावना के साथ भद्दा मजाक करार दिया। समिति के आरपी गौतम, हितेश सिंह, राकेश कुमार, विजय निषाद ने जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की चेतावनी दी।
बाद में धरना स्थल पर पहुंचे मंडलायुक्त प्रतिनिधि को आंदोलनकारियों ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन का संबोधन राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, सुप्रीम व हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित था। इसमें यूनिवर्सिटी में शिक्षक नियुक्ति को लेकर 19 फरवरी के नए शासनादेश को निरस्त करने की मांग की गई है।
इस दौरान संतोष कुमार, इंद्रेश कुमार, अमन यादव, सुरेंद्र प्रजापति, नितेश कुमार, संजय यादव, रामा यादव, राजन कुमार गौड़, आशीष यादव, डॉ. वीरेंद्र यादव, डॉ. बलजीत, विदुर जायसवाल, अजीत कुमार, प्रियंका, डॉ. पुष्पा भारती आदि मौजूद रहीं।