कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि प्रो. बीएस बुटोला को स्मृति चिह्न व अंग वस्त्र देकर सम्मनित किया गया।
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जेएनयू में रीजनल डेवलेपमेंट स्टडी विभाग के अध्यक्ष प्रो. बीएस बटोला का कहना है कि विकास के लिए प्रदेश के निर्धारण में स्थानीय संसाधन और सांस्कृतिक धरोहर में लगी पूंजी की अवहेलना नहीं होनी चाहिए, पर ऐसा हो नहीं रहा। इसके लिए उन्होेंने उन अर्थशास्त्रियों को दोषी ठहराया, जिन्होंने स्थानीय संसाधन और सांस्कृतिक की उपेक्षा करते हुए विकास प्रक्रिया को आंकड़ों के मकड़जाल में उलझा दिया है।
प्रो. बटोला गोरखपुर यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग में पृथ्वी पर्व रजत जयंती वर्ष पर आयोजित व्याख्यानमाला के शुभारंभ पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। ‘प्रादेशिक विकास’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि प्रादेशिक विकास की दृष्टि से जनपद को इकाई मानना उपयुक्त नहीं है, क्योंकि जिले का सीमा निर्धारण अंग्रेजों द्वारा विकास को ध्यान में रखकर नहीं किया गया था बल्कि उनका लक्ष्य राजस्व इकट्ठा करना था।
व्याख्यानमाला की शुरुआत प्रो. बटोला ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ की। विषय प्रवर्तन करते हुए इंस्टीट्यूट फॉर रूरल इको डेवलेपमेंट के सचिव और व्याख्यानमाला के संयोजक प्रो. केएन सिंह ने कहा कि इस क्रम में वर्ष भर समसामयिक मुद्दों पर व्याख्यान आयोजित किए जाते रहेंगे। पं. दीनदयाल के जन्मदिन के अवसर पर 25 सितंबर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. एसके दीक्षित ने और आभार ज्ञापन प्रो शिवाकांत सिंह ने किया।