इंसेफेलाइटिस वार्ड में कुशीनगर निवासी मासूम आफताब की मौत के मामले में लापरवाही के आरोपों को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने गंभीरता से लिया है। सुबह होते ही उन्होंने वार्ड का निरीक्षण किया और इस संबंध में डॉक्टरों से जानकारी ली। वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ बैठक कर उन्हें लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई को लेकर चेताया।
बता दें कि रविवार रात इंसेफेलाइटिस वार्ड में आफताब की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया था। उनका आरोप था कि मासूम की तड़पकर मौत हो गई, लेकिन वार्ड में चिकित्सक ढूंढे नहीं मिले। उनका कहना था कि अगर समय पर डॉक्टर ने उसे देखा होता तो शायद उसकी जान बच जाती। रात दो बजे हुए इस हंगामे के बारे में सोमवार को अखबार के जरिए प्राचार्य को जानकारी मिली तो सुबह ही वार्ड के निरीक्षण को निकल पड़े। प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा ने वार्ड के निरीक्षण के बाद विभाग के सीनियर डॉक्टरों के साथ बैठक की। प्रो. राजीव मिश्रा ने डॉक्टरों से दो टूक कह दिया है कि किसी भी तरह की लापरवाही वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। दो खराब वेंटिलेटर और 18 मॉनीटर के बारे में भी पूछताछ की। कहा कि जो भी कमियां हैं उन्हें जल्द दूर कर लिया जाए।
इंसेफेलाइटिस से तीन की मौत, 28 भर्ती
इंसेफेलाइटिस से मंगलवार को तीन और मरीजों की मौत हो गई। इंसेफेलाइटिस से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते 24 घंटे के भीतर कुशीनगर तरया सुजान की रिंकी कुमारी (8) पुत्री धमेंद्र, गोंडा प्रेम यादव (3) पुत्र शिवकुमार, गोला बाजार के राज (6) पुत्र संतोष की मौत हो गई। जनवरी से अब तक 770 मरीज इलाज को अकेले मेडिकल कॉलेज में आ चुके है जिसमें से 197 मरीजों की मौत हो चुकी है। अभी 99 मरीजों का उपचार चल रहा है।
डॉक्टर की लापरवाही से लटका इलाज
एईएस नंबर जारी करने को लेकर डॉक्टरों की लापरवाही मरीजों की मुसीबत बढ़ा रही है। मंगलवार को इसकी जानकारी पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई। डॉक्टर को फोन कर तत्काल नंबर जारी करने को कहा। इस सबके बीच मरीज को मुफ्त इलाज देर से शुरू हो सका। मेडिकल कॉलेज में संभावित एईएस के मरीज भर्ती होने के बाद डॉक्टर उसकी जांच कर डायग्नोसिस करते हैं। डॉक्टर रिपोर्ट के आधार पर जब उसे एईएस मरीज घोषित कर देते हैं तो उसका एसईएस नंबर जारी होता है। इस नंबर से ही उसे मुफ्त जांच और दवा की सुुविधा मिलती है।
मंगलवार को डॉक्टर राउंड पर तो गए मगर नंबर जारी ही नहीं किया। जब दोपहर में सीएमओ ने फोन कर मंगलवार को भर्ती हुए मरीजों की संख्या पूछी तब उन्हें इसका पता चला। सीएमओ को बताया गया कि अभी नंबर ही नहीं जारी हुआ है। यह सुनने के बाद सीएमओ खफा हो गए और उन्होंने तत्काल डॉक्टर को फोन कर नाराजगी जाहिर की जिसके बाद नंबर जारी हुआ और मरीजों का मुफ्त इलाज की सुविधा मिलनी शुरू हुई।