कंद्रीय टीम ने आठ जुलाई को एम्स की प्रस्तावित जमीन का मुआयना किया था।
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गोरखपुर में एम्स की स्थापना को लेकर लंबे समय से चल रही कयासबाजी पर विराम लग गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट किया है कि गन्ना शोध संस्थान की जमीन पर ही एम्स बनेगा। यह जमीन एम्स के लिए उपयुक्त है और वहां कोई अड़चन नहीं है। जो भी बाधाएं थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि 22 जुलाई को गोरखपुर आ रहे पीएम खाद कारखाने के साथ ही एम्स का भी शिलान्यास कर सकते हैं। इसे लेकर प्रशासन सतर्क भी है। इसके लिए खाद कारखाना और गोरखनाथ मंदिर के साथ गन्ना शोध संस्थान में भी सुरक्षा व्यवस्था आदि की तैयारियां जोरों पर हैं।
‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने कहा कि एम्स को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं है। गोरखपुर में एम्स बनेगा, यह पहले ही तय हो चुका है। खुटहन की जमीन में पेंच फंसने से गन्ना शोध संस्थान की जमीन का चयन किया गया। केंद्रीय टीम इसका निरीक्षण भी कर चुकी है। यह जमीन हर लिहाज से उपयुक्त है। प्रस्तावित जमीन से थोड़ी ही दूरी पर एयरफोर्स होने के जिक्र पर उन्होंने दो टूक कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। उधर, रक्षा मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि गोरखपुर में एम्स को लेकर उनसे कोई जानकारी नहीं मांगी गई है।
बता दें कि एम्स के लिए प्रस्तावित जमीन के मुआयने के लिए आई केंद्रीय टीम ने भी शोध संस्थान की जमीन को उपयुक्त बताया था। क्योंकि शहर के बीचों-बीच होने के साथ ही सड़क से कनेक्टिविटी, पास में ही एयरपोर्ट और एनईआर का मुख्यालय, बिजली, पानी कई ऐसी सुविधाएं हैं जो एम्स के मानकों को पूरी करती हैं। मगर उन्होंने एम्स के लिए दो तकनीकी पहलुओं पर चिंता जताते हुए उन मसलों पर संबंधित मंत्रालय के ही फैसला लेने की बात कही थी। इनमें जमीन का रक्बा और एयरफोर्स परिसर से गन्ना शोध संस्थान का नजदीक होना शामिल है।
एयरफोर्स से कोई जानकारी नहीं मांगी: रक्षा मंत्रालय
रक्षा मंत्रालय के पीआरओ विंग कमांडर बीबी पांडेय ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि गोरखपुर में एम्स को लेकर रक्षा मंत्रालय से अभी तक कोई जानकारी नहीं मांगी गई है। मंत्रालय को इस संबंध में अभी कोई जानकारी भी नहीं है।