अभियान थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने ‘ताजमहल का टेंडर’ नाटक के जरिए सरकारी व्यवस्था पर चोट की। रैंपस कॉलेज में सोमवार को नाटक का मंचन कर कलाकारों ने दिखाया कि किस प्रकार व्यवस्था के आगे आम इंसान हार जाता है और एक दिन दुनिया छोड़ देता है। नाटक के साथ ही तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव का भी समापन हो गया।
अजय शुक्ल कृत ‘ताजमहल का टेंडर’ नाटक आईएफटीटी के प्रशिक्षित रंगकर्मियों ने बड़े ही रोमांचक ढंग से पेश किया। नाटक में शासन सत्ता में भ्रष्ट लाल फीताशाही में जकड़े आम आदमी का सांकेतिक चिंतन किया गया। अफसरों के कड़े प्रयास के बावजूद ताजमहल का टेंडर निकलने में 25 वर्ष लग जाते हैं और शाहजहां बेगम मुमताज की याद में बनने वाले ताजमहल की उम्मीद लगाए ही संसार से विदा हो जाते है। बावजूद चीफ इंजीनियर यही कहता है कि ‘वक्त गुजर गया, बात बीत गई, लेकिन हम नहीं जाएंगे, फिर कोई ताज का ख्वाब सजाएगा और हमें बुलाएगा।
नाटक में आकाश ने शाहजहां, नेहा भास्कर ने बेगम मुमताज, सुमितेंद्र ने इंजीनियर की भूमिका अदा की। गेस्ट आइटम में विशाल ने अपनी कॉमेडी से दर्शकों को लोटपोट कर दिया। अफ्फान नवाब, आशीष पासवान, दीप नारायण, सत्यम, बालेंद्र, अभिनव और घनश्याम ने भी भूमिका निभाई।