47 ग्राम पंचायतों से वापस ली जाएगी परफार्मेंस ग्रांट
गोरखपुर। समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान 14वें वित्त के तहत पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में गांवों में आय का स्रोत पैदा करने और पारदर्शी हिसाब-किताब रखने के नाम पर मिली परफ ार्मेंस ग्रांट (निष्पादन अनुदान) 47 पंचायतों से वापस ली जाएगी। इसके बाद फिर से पंचायतों का चयन कर उन्हें यह ग्रांट दी जाएगी।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर के मुताबिक राज्य स्तर से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दो मानकों को पूरा करने वाली ग्राम पंचायतों को फिर से आवेदन करना होगा। पात्र ग्राम पंचायतों का चयन कर उन्हें धनराशि दी जाएगी। ग्राम पंचायतों द्वारा अनुदान के लिए 27 सितंबर से 7 अक्तूबर तक आवेदन किया जा सकेगा। आठ अक्तूबर 2019 से 15 अक्तूबर 2019 तक जनपद स्तरीय समिति द्वारा परीक्षण के बाद पंचायतों के नाम पोर्टल पर अपलोड कर पंचायती राज निदेशालय को उपलब्ध कराएगा जाएगा। 28 अक्तूबर तक निदेशालय द्वारा संकलित सूची तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
जिले स्तर पर आवेदनों के परीक्षण के लिए जनपद स्तर पर तैनात कमेटी में सीडीओ को अध्यक्ष, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सदस्य, डीएम द्वारा नामित एसडीएम सदस्य तथा लेखा व वित्त विभाग के अधिकारी सदस्य होंगे। डीपीआरओ सचिव होंगे। इसी तरह पर पात्रता का निर्धारण करने के लिए राज्य स्तर पर निदेशक पंचायती राज की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय कमेटी बनी है।
खातों पर रोक के बाद भी निकाल ली ग्रांट की रकम
गोरखपुर। निष्पादन अनुदान की वसूली जिला प्रशासन के लिए आसान नहीं होगी। इस अनुदान में जबरदस्त धांधली हुई है। शासन से परफ ार्मेंस ग्रांट पाने वाली ग्राम सभाओं के खातों पर रोक के बावजूद कुछ पंचायत सचिव और प्रधानों ने न केवल खातों से धन निकाल लिया बल्कि उसे खर्च भी कर दिया। जांच में इसका खुलासा होने के बाद डीपीआरओ ने संबंधित सचिवों और प्रधानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कुछ पर कार्रवाई भी हुई है मगर ज्यादातर बचे हैं। अब भी बड़ा सवाल यह है कि उनसे इस राशि की वसूली कब और कैसे होगी।
14वें वित्त आयोग की संस्तुतियों पर वर्ष 2016-17 में गोला, सरहरी, मझगांवा, जंगल कौड़िया परमेश्वरपुर, नरायनपुर, मरची, बेलवा, ब्रह्मपुर, भेउस उर्फ बनकट, खजनी, बनकटा, समेत जनपद की 47 ग्राम पंचायतों में परफ ार्मेंस ग्रांट (निष्पादन अनुदान) की धनराशि भेजी गई थी। यह धनराशि 40 लाख से लेकर एक करोड़ तक थी। ग्रांट बांटने में भी धांधली की शिकायतें र्हुइं। पूरे प्रदेश से जब इस तरह की शिकायतें मिलने लगीं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजिलेंस जांच बैठा दी और साथ ही संचालन पर रोक लगाते हुए खातों को सीज कर दिया।
क्या होती परफ ार्मेंस ग्रांट
14वें वित्त आयोग से सभी ग्राम पंचायतों को आवंटित होने वाली कुल धनराशि का 10 फ ीसद हिस्सा रोक लिया जाता है। बची हुई यह धनराशि सिर्फ उन्हीं ग्राम पंचायतों में जारी की जाती है जो विशेष रूप से दो कार्य करती हैं। पहला स्वयं के स्रोतों से अपनी आय के साधन तैयार करती हों और दूसरा दो सालों की आडिट रिपोर्ट तैयार रखती हों। उन्हें प्रोत्साहन के रूप में परफ ार्मेंस ग्रांट की धनराशि आवंटित की जाती है। पिछली सरकार में प्रदेश के कई जनपदों में ग्राम पंचायतों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे परफ ार्मेंस ग्रांट हासिल कर उसका दुरुपयोग किया था, जिसके बाद उसकी जांच शुरू हुई थी।