बड़े नोटों पर पाबंदी के 9वें दिन भी लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुईं। शहर के ज्यादातर एटीएम में बृहस्पतिवार को दिन भर सूखा पड़ा रहा। बैंकों में भी स्थिति अच्छी नहीं रही। कुछ बैंकों में तो नोट ही एक्सचेंज नहीं किए गए। दोपहर बाद रिजर्व बैंक से करेंसी आने से सुधार हुआ और देर शाम तक एटीएम पर लोगों की कतारें लगी रहीं।
बुधवार को आरबीआई की ओर से करेंसी उपलब्ध न कराने से एटीएम का नहीं बल्कि बैंकों का भी बुरा हाल रहा। बहुत सारे बैंकों में 1000 और 500 रुपये के नोटों को बदलने का काम नहीं हुआ। पीएनबी की रामगढ़ताल शाखा ने सिर्फ अपने ग्राहकों को निकासी फार्म और चेक के आधार पर ही भुगतान किया। यही स्थिति बहुत सारे बैंकों की रही। करेंसी न आने से शाम तक एटीएम भी सूखे रहे। स्टेट बैंक के एजीएम अमर सिंह ने बताया कि मंगलवार को आरबीआई से मिली रकम से बृहस्पतिवार को किसी तरह काम चलाया गया। हालांकि एटीएम की स्थिति में दोपहर बाद सुधार हुआ। आरबीआई से रकम मिलने के बाद एटीएम में रकम डाली गई।
शुक्रवार को आरबीआई से रकम मिलने की उम्मीद नहीं है। इस दिन 500 रुपये के नए नोट आने की संभावना है। उधर, पीएनबी के मंडल प्रमुख टी बड़पंडा ने बताया कि जरूरत के हिसाब से काफी कम रकम मिल रही है। बृहस्पतिवार को किसी तरह काम चलाया गया। हम लगातार आरबीआई के संपर्क में हैं। वहां से रकम मिल जाती है तो स्थिति में सुधार हो पाएगी।
कहीं पहुंची स्याही, कहीं मार्कर से चलाया काम
एसबीआई मेन ब्रांच, एचडीएफसी की कुछ शाखाओं में गुरुवार को नोट बदलने वालों की अंगुली पर स्याही लगाई गई, जबकि एक्सेस बैंक में तो मार्कर से काम चलाया गया। बाजार में अमिट स्याही उपलब्ध न होने से बैंक खरीदारी नहीं कर पाए। स्याही उपलब्ध कराने के लिए बैंकों ने प्रशासन तथा निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है। गुरुवार को भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर स्याही उपलब्ध कराई गई। इसके बाद से इस शाखा पर नोट बदलने के लिए आने वाले लोगों को स्याही लगाई गई। यहीं से कुछ बैंकों को भी स्याही उपलब्ध कराई गई।
स्याही लगने से छोटी हो गई कतार
पुराने 1000 और 500 रुपये के नोट बदलने के लिए अंगुली पर स्याही लगने की सूचना के बाद से लाइन में लगने वालों की संख्या कम हो गई। लगभग सभी बैंकों में नोट बदलने वालों की संख्या और दिनों की अपेक्षा गुरुवार को काफी कम रही। हालांकि नोट जमा करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं दिखी।
पूर्वांचल बैंक में हंगामा, प्रबंधक का नेम प्लेट तोड़ा
पूर्वांचल बैंक की मोहद्दीपुर शाखा में धन निकासी में दिक्कत होने पर ग्राहकों ने जमकर बवाल काटा। उन्होंने शाखा प्रबंधक का नेम प्लेट तोड़ डाला। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। दरअसल लोग काउंटर से धन निकासी के लिए लाइन लगाए थे लेकिन करेंसी कम होने के कारण एक एक हजार रुपये दिया जा रहा था, जबकि ग्राहक अधिक रकम की मांग कर रहे थे। इस दौरान एक खाताधारक पांच हजार रुपये की मांग पर अड़ गया। नकदी न होने का हवाला देकर बैंक प्रबंधन ने अधिक धनराशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद खाताधारक नाराज होकर हंगामा और नारेबाजी करने लगे।
एटीएम सामान्य होने में अभी लगेगा और वक्त
एटीएम से कैश निकासी के लिए लंबी लाइन लग रही है। शहरी क्षेत्र के सभी एटीएम अभी नहीं चल रहे हैं। यदि सभी एटीएम से कैश निकासी शुरू हो जाएतो बैंकों में लाइन छोटी हो जाएगी। सिर्फ अधिक भुगतान लेने के लिए ही लोग बैंकों के काउंटर पर जाएंगे। शहर में बैंकों के पर्याप्त एटीएम लगे हैं लेकिन अधिकांश एटीएम के शटर डाउन चल रहे हैं। कुछ एटीएम में दो हजार के नए नोट भी भरे जा रहे हैं। जिन एटीएम में सिर्फ 100 के नोट भरे जा रहे हैं वे दो से तीन घंटे में ही खाली हो जा रहे हैं।
300 प्रतिशत बढ़ी प्लास्टिक मनी से खरीदारी
नोट बंदी के बाद प्लास्टिक मनी (क्रेडिट और डेबिट कार्ड) से खरीदारी काफी बढ़ गई है। एक ओर जहां दुकानदार स्वैप मशीन की खरीदारी के लिए बैंकों में आवेदन कर रहे हैं वहीं दुकानों में इनसे सामान्य दिनों की तुलना में तकरीबन तीन गुनी बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। एचडीएफसी, एक्सेस आदि बैंकों में अधिकारियों के अनुसार इनमें कम से कम 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। एचडीएफसी बैंक रोड के प्रबंधक संदीप कर कहना है कि 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों की बंदी के बाद प्लास्टिक मनी के उपयोग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।
एसबीआई के एटीएम से निकले मात्र 2000 रुपये
एटीएम से नकदी निकालने की लिमिट 2500 रुपये होने के बावजूद स्टेट बैंक के कई एटीएम से मात्र 2000 रुपये ही निकल रहे हैं। लंबी लाइन में लगने के बावजूद 2000 रुपये निकलने की वजह से लोगों में काफी मायूसी रही। एसबीआई के एटीएम प्रभारी आरसी दुबे ने बताया कि कुछ एटीएम के प्रोग्रामिंग में थोड़ी कमी रह गई है। इस वजह से मात्र 2000 रुपये ही निकल पा रहे हैं। इस संबंध में मुख्यालय को मेल किया गया है। जल्द ही इसमें सुधार हो जाएगा।
‘किस्तों’ पर भी नोटबंदी की मार
किसी ने गाड़ी खरीदी है, किसी ने घर बनवाया है तो किसी को एलआईसी की किस्त का भुगतान करना है। दिन भर लाइन में लगने के बाद भी लोग किस्त की रकम नहीं जमा कर पा रहे हैं। चेक देने के बाद भी इसके क्लियरेंस में देरी होने से लोगों पर ब्याज की मार पड़ने लगी है, जबकि लोग समय से चेक जमा कर दे रहे हैं। एलआईसी के डीओ अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि केवल नौ नवंबर से 30 नवंबर तक की पॉलिसी में पेनाल्टी में छूट दी गई है।
बैंकों में आधी रह गई है चेक की आमद
नोटबंदी के बाद बैंकों के अन्य काम काफी प्रभावित हुए हैं। बैंकों का सारा ध्यान नोट बदलने और लोगों को नए 2000 के नोट के अलावा छोटे नोट देने तक सीमित रह गया है। बैंकों के अन्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसी काम में लगा दिया गया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी बाजार में भी काफी कम कारोबार हो पा रहा है। इस वजह से चेक आदि के मामले घटकर मात्र 40 प्रतिशत ही रह गए हैं। पीएनबी आरसीसी के अधिकारी राकेश कुमार राय ने बताया कि एक भी चेक हमारे यहां पेंडिंग में नहीं हैं। उम्मीद है कि पर्याप्त नोट आ जाने के बाद बाजार में भी रौनक आएगी और चेक क्लियरेंस की संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाएगी।