आईएमए की हड़ताल, मरीज-तीमारदार रहे बेहाल
गोरखपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की हड़ताल के चलते जहां मरीजों की तकलीफ बढ़ गई, वहीं तीमारदार भी परेशान हुए। लोकसभा में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल पारित होने के बाद आईएमए की ओर से देशव्यापी आंदोलन का एलान किया गया है। उसी क्रम में जिला इकाई ने भी 24 घंटे का कार्य बहिष्कार किया। इस दौरान निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रही। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं।
आईएमए की हड़ताल से बुधवार को मरीज को लेकर तीमारदार परेशान रहे। वे मरीज का इलाज कराने के लिए दिनभर इधर-उधर भटकते रहे। निजी नर्सिंग होम्स की ओपीडी में दिनभर बंद रही। उससे जिला अस्पताल के साथ ही प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भीड़ रही। प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल के मद्देनजर सरकारी अस्पतालों में पहले से इंतजाम कर लिए गए थे, लेकिन मरीजों का दबाव ज्यादा होने से लोगों को अपनी बारी के लिए देर तक इंतजार करना पड़ा। सोमवार को जिला अस्पताल में ऑपरेशन के लिए मरीजों को अगली तिथि दे दी गई। हड़ताल की वजह से किसी भी डॉक्टर की ओपीडी नहीं चली। बेतियाहाता, रुस्तमपुर, दाउदपुर, पैडलेगंज, मोहद्दीपुर, समेत अन्य स्थानों पर सभी क्लीनिकों पर ताले लटके थे, या तो शटर आधे गिरे हुए थे।
आईएमए पदाधिकारियों ने बैठक कर जताया विरोध
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीतापुर आई हॉस्पिटल में इस मुद्दे को लेकर बैठक की। सचिव डॉ राजेश गुप्ता ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बिल पारित होने के बाद अब धारा 32 के तहत देश भर में साढ़े तीन लाख से अधिक पैरा मेडिकल स्टाफ डॉक्टरों की तर्ज पर मरीजों का इलाज कर सकेंगे। इसके लिए पैरा मेडिकल को सिर्फ ब्रिज कोर्स करना होगा। अध्यक्ष डॉ. एपी गुप्ता ने कहा कि इस प्रावधान का पुरजोर विरोध किया जाएगा। साथ ही बिल लागू होते ही देश में चिकित्सा शिक्षा बेहद महंगी हो जाएगी। निजी मेडिकल कॉलेज छात्रों से मनमानी फ ीस वसूलेंगे और इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा। आईएमए की बैठक में डॉक्टरों ने इसे काला कानून बताते हुए इसके बहिष्कार की घोषणा की। प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ. आरपी त्रिपाठी ने कहा कि इस बिल के लागू होने से 50 प्रतिशत डॉक्टर एमबीबीएस करने से वंचित रह जाएंगे। इस दौरान डॉ नदीम अर्शद, डॉ. आरपी शुक्ला, डॉ. शशांक शुक्ला, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, डॉ. अमित मित्तल, डॉ. शशिकांत दीक्षित, डॉ. शालिनी अग्रवाल मौजूद थीं।
ओपीडी में दो गुणी संख्या में मरीज पहुंचे
शहर के ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी बंद रहने का सीधा असर जिला अस्पताल में दिखा। यहां पिछले दिनों की तुलना में ओपीडी में दोगुनी संख्या में मरीज पहुंचे। अचानक मरीजों के पहुंचने के चलते लोगों को घंटों तक अपना नंबर आने का इंतजार करना पड़ा।
जारी रहीं इमरजेंसी सेवाएं
अस्पतालों में ओपीडी बंद थी, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं जारी रही। अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर पहुंचे। अस्पताल में पहुंचने वाले जिन मरीजों की हालत गंभीर लगी, इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत देखने के साथ ही उपचार भी किया।
हड़ताल में रहे शामिल
शहर के लगभग 300 निजी अस्पताल
250 निजी क्लीनिक
आईएमए के सभी 850 डॉक्टर
10,000 मरीज हुए प्रभावित