नगर निगम को पता ही नहीं है कि शहर में कितनी डेयरी है। दो महीने से हो रहे सर्वे में नगर निगम अब तक केवल 116 डेयरी को ही चिह्नित कर सका है। डेयरी चिह्नित करने में सबसे बड़ी बाधा पार्षद हैं। अधिकांश पार्षद अपने वार्ड में संचालित डेयरी का सर्वे करने जा रही टीम को काम नहीं करने दे रहे हैं। इसके चलते अब तक डेयरी संचालकों को निगम नोटिस जारी नहीं कर सका है।
शहर में आए दिन छुट्टा पशुओं के बीच लड़ाई की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सांड़ों पर लगाम लगाने का कोई मुकम्मल इंतजाम करने को लेकर नगर निगम अब तक संजीदा नहीं हुआ है। पशुबाड़े के लिए जमीन भी नहीं तलाशी जा रही है। इससे लोगों में जबरदस्त रोष है। पार्षद भी बोर्ड की बैठक में इसको मुद्दा बनाने में लगे हुए हैं। हालांकि शहर में ज्यादा समस्या डेयरी संचालकों द्वारा दुधारू पशुओं को छोड़ देने की वजह से भी है।
सांड़ के बढ़ रहे हमले के बाद नगर निगम ने डेयरी संचालकों को चिह्नित कर नोटिस भेजने की तैयारी शुरू की थी। लेकिन दो महीने के सर्वे में अब तक केवल 116 डेयरी ही चिह्नित हुए। इनमें तकरीबन 1160 पशु हैं। जबकि अभी भी शहर में लगभग 100 से ज्यादा डेयरी ऐसी है जिन्हें चिह्नित नहीं किया जा सका है। ऐसा नहीं है कि नगर निगम के कर्मचारियों को इनकी जानकारी नहीं है लेकिन पार्षदों के हस्तक्षेप की वजह से डेयरी संचालन का नाम और मोबाइल नंबर नहीं मिल सका है। ऐसे में अब डेयरी संचालकों को नोटिस भेजना नगर निगम के लिए टेढ़ी खीर साबित हो जाएगा।
'डेयरी संचालकों को जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा। कुछ जगहों पर दिक्कत आई थंी। उसे बातचीत कर हल कर लिया गया है। '
- स्वर्ण सिंह, सहायक नगर आयुक्त