गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में मंगलवार की सुबह बम की अफवाह से अफरातफरी मची रही। ट्रॉमा सेंटर के सामने प्लास्टिक के एक डिब्बे को बम समझने के चलते करीब डेढ़ घंटे तक माहौल असामान्य रहा। उक्त डिब्बा दुर्घटना में घायल एक ट्रक ड्राइवर का निकला, जिसका इलाज ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। 100 नंबर पर सूचना के बाद पहुंची पुलिस टीम ने भी जांच के बाद तस्दीक की कि यह बम नहीं है।
सुबह साढ़े आठ बजे इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रवीण सिंह की नजर काउंटर रूम से बाहर रखे एक काले रंग के झोले पर पड़ी। इसमें से दो तार निकले हुए थे। झोले को देखकर वह उसके मालिक को खोजने लगे। जब आसपास कोई नहीं मिला तो उन्हें शक हुआ कि कहीं यह बम तो नहीं है। बात तेजी से फैली और ट्रॉमा सेंटर में काम कर रहे सभी कर्मचारी और डॉक्टर बाहर आ गए। इसके बाद 100 नंबर पर सूचना दी गई।
मेडिकल कॉलेज परिसर में बम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। यहां तक पुलिस की ओर से इसकी सूचना डीएम तक पहुंचा दी गई। आनन-फानन में गुलरिहा थानाध्यक्ष मय दलबल मौके पर पहुंचे। जब झोले की तहकीकात हुई तो उसमें लाइसेंस, खाली प्लास्टिक का डिब्बा और दो तार मिले, जिन्हें देखकर बम होने की आशंका हुई थी। पुष्टि के बाद कॉलेज के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।
थोड़ी देर बाद एक व्यक्ति आया और अपना झोेला खोजने लगा। जब उसे उस झोले को दिखाया गया तो उसने बताया कि वह उसी का है। वह ट्रक ड्राइवर भगवान दास का तीमारदार था, जो ट्रामा सेंटर में भर्ती था। उसने बताया कि आठ तारीख को खोराबार थाना क्षेत्र के जगदीशपुर में ट्रक और डीसीएम की टक्कर में भगवान दास घायल हो गया था।