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निर्भया फंड को लेकर गोरखपुर में क्या थे दावे और कैसी है हकीकत, चौंकाते हैं आंकड़े

Fri, 06 Dec 2019 12:09 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
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आधी आबादी की आर्थिक मदद को बनाए गए निर्भया फंड के इस्तेमाल में आज भी प्रशासनिक अफसर पीछे हैं। फंड का इस्तेमाल सिर्फ आर्थिक मदद को ही किया जाता है। आज तक इसका इस्तेमाल कर सीसी टीवी कैमरे नहीं लगाए जा सके। ना ही कोई अन्य संसाधन महिला सुरक्षा को बढ़ाए जा सके। महिला आरक्षियों को बाइक देने की योजना भी पूरी तरह से अमल में नहीं आ सकी है।
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दिल्ली में निर्भया कांड के बाद ही तत्कालीन सरकार ने फंड दिया था। इसके तहत दुष्कर्म, छेड़खानी सहित महिला अपराध से संबंधित धाराओं में आर्थिक मदद दी जाती है ताकि कानूनी लड़ाई में रुपये की कमी ना आ सके। इसी फंड के तहत रानी लक्ष्मी बाई योजना भी चलती है।

गोरखपुर जिले में इस योजना के तहत 43 लोगों की तीन साल में मदद की जा चुकी है। वहीं पांच मामलों की फाइल तैयार कर भेजी गई है। जिला प्रोवेशन अधिकारी सर्वजीत सिंह ने बताया कि तीन साल में 43 लोगों की आर्थिक मदद की जा चुकी है। पांच लोगों के मदद के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द ही उन्हें भी मदद दिलाया जाएगा।
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थाने में हेल्प डेस्क तो बनी मगर पिंक स्कूटी नहीं आई

जिले के थानों में हेल्प डेस्क बनाई गई मगर पिंक स्कूटी नहीं आ सकी। योजना लांच होने के दौरान ही इस बात पर जोर दिया गया था कि पिंक स्कूटी से महिला आरक्षी सुरक्षा में लगाई जाएंगी। शहर में महिला थाने की महिला आरक्षी ही कभी कभार स्कूटी से नजर आती हैं।

शहर में सिर्फ ग्यारह कैमरे
शहर में यातायात पुलिस की पहल पर ग्यारह कैमरे लगाए गए हैं जिसका इस्तेमाल सुरक्षा में हो जाता है। मगर अन्य तैयारियां फाइलों में ही दबकर रह गईं। हर बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से कैमरे लगाने की कवायद होती है। कई बार व्यापारियों से भी मदद मांगी गई है लेकिन कैमरे नहीं लग पाए। निर्भया फंड के तहत सीसी टीवी कैमरे लगाने की योजना थी ताकि वारदात होने की दशा में बदमाश की पहचान हो सके और सबूत के तौर पर उसे प्रस्तुत कर आरोपी पर कार्रवाई कराई जा सके।
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