फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनईआर में लोको पायलट और गार्ड की कमी, तनाव में कर रहे कर्मचारी काम

Sun, 22 Sep 2019 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो राजन राय, अमर उजाला, गोरखपुर
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

ट्रेनों को सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचाने वाले लोको पायलट (चालक) और गार्ड तनाव में हैं। स्वीकृत पदों के मुताबिक न तो लोको पायलट हैं और न ही गार्ड। इसके चलते तय शेड्यूल से ज्यादा ड्यूटी करना पड़ती है।

विज्ञापन


पुरानी पेंशन योजना, भत्तों में अनियमितता, वर्दी भत्ता बढ़ाने सहित कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर लोको पायलट और गार्ड एसोसिएशन आंदोलित है। इसी क्रम में बीते माह लोको पायलटों ने उपवास रखकर ट्रेनों को चलाया। ड्यूटी करने के बाद अतिरिक्त समय में वे आंदोलन करते हैं। पर लंबे समय से उनकी मांगे यथावत है। सुनने में अजीब लगेगा कि एक तरफ रेलवे योग, ट्रेनिंग के जरिए कर्मचारियों का तनाव दूर करने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी तरफ समस्याओं पर ध्यान न देकर तनाव को अपरोक्ष रूप से बढ़ा भी रहा है।

एनईआर में 150 से ज्यादा गार्ड के पद खाली
एनईआर में 150 से ज्यादा गार्ड के पद रिक्त हैं। इसमें गोरखपुर पूर्व में ही 35 गार्ड की कमी है। इसका असर ट्रेनों के संचालन पर देखने को मिल रहा है। आए दिन पैसेंजर ट्रेनें विलंब से रवाना होती हैं।
विज्ञापन


ऑल इंडिया गार्ड कौसिंल की प्रमुख मांगें
गार्ड की कमी को नई भर्ती के जरिए पूरा किया जाए।
रनिंग भत्ता (माईलेज) को यात्रा भत्ता (टीए) की तरह आयकर के दायरे से मुक्त किया जाए।
मालगाड़ी गार्ड का वेतन निर्धारण स्टेशन मास्टर की तरह 4200 ग्रेड पे।
ग्रेड पे के तहत 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल 6में निर्धारित किया जाए।
स्टेशन मास्टर की तरह वर्दी भत्ता 5000 की जगह 10000 रुपये किया जाए।
मालगाड़ी गार्ड को विशेष रनिंग भत्ता।
गार्ड के लिए हार्ड ड्यूटी रिस्क एलाउंस की व्यवस्था।
कार्यकाल में न्यूनतम तीन एमएसीपी का लाभ दिया जाए।
रनिंग भत्ता को आरएसी 1980 के फार्मूले के अनुसार पुनर्निर्धारण किया जाए।
2016 के पूर्व सेवानिवृत्त गार्ड सही से पेंशन का निर्धारण हो।
गार्ड संवर्ग को संरक्षा कोटि में शामिल कर दुर्घटना मुक्त सेवा संरक्षा पुरस्कार।
रेलवे की सर्वोच्चता बरकरार रखते हुए निजीकरण पर रोक लगे।
पुरानी पेशन व्यवस्था बहाल की जाए।
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन की मांगे
लोको पायलट तथा ट्रैफिक रनिंग स्टॉफ का किलोमीटर भत्ते की दर आरएसी 1980 के फार्मूले पर हो।
खाली पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए।
रनिंग स्टॉफ का बेवजह स्थानांतरण तत्काल बंद हो।
रेलवे में निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
श्रम कानूनों के नियोक्ताओें के अनुकूल बनाकर श्रमिक वर्ग मिली सामाजिक सुरक्षा समाप्त करने की साजिश बंद हो।
जर्जर हो चुके रेलवे ट्रैक, चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल ठीक कराया जाए।
बैंक, ऑटो सेक्टर की तरह प्राथमिकता दी जाए।
रेलवे के कार्यों को ठेका पर देना बंद किया जाए।
तेजस, राजधानी, शताब्दी ट्रेनों को निजी ऑपरेटर को न दिया जाए।

गार्ड की कमी बड़ी समस्या
गार्ड की कमी बड़ी समस्या है। इसके चलते ओवर टाइम करना पड़ता है। भत्ता संबंधित कई कमियां हैं। उसे रेलवे बोर्ड और मंत्रालय के समक्ष उठाया जाता है। ट्रेन या मालगाड़ी को चलाने में गार्ड की अहम भूमिका होती है। उनकी समस्याएं शून्य होनी चाहिए। लेकिन गार्ड अपनी समस्याओं से परेशान हैं और उसका मनोबल गिरता जा रहा है। रेलवे बोर्ड प्राथमिकता पर समस्याओं का समाधान कराए। - जीबीएस त्रिपाठी, केंद्रीय सहायक महासचिव ऑल इंडिया गार्ड कौंसिल

तनाव में ट्रेन चलाते हैं लोको पायलट
समस्याओं को उठाने वाले लोको पायलट को टारगेट कर स्थानांतरित किया जा रहा है। नौ लोको पायलट शंटरों का जबरन गोरखपुर से गोंडा स्थानांतरण कर दिया गया। लोको पायलट की कमी से ड्यूटी ज्यादा करनी पड़ रही है। लोको पायलट अपनी समस्याओं से - जग नारायण, क्षेत्रीय अध्यक्ष एआईएलआरएसएजब तनाव में रहेंगे तो इसका असर ट्रेनों के संचालन पर पड़ेगा। एक तरफ तनाव कम करने की ट्रेनिंग दी जाती है और दूसरी ओर समस्याओं का समाधान न कर तनाव बढ़ाया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें