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... तो भाजपा समर्थित संगठनों को फायदा पहुंचाने के लिए टला चुनाव

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... तो भाजपा समर्थित संगठनों को फायदा पहुंचाने के लिए टला चुनाव
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गोरखपुर। रेलवे में 28-29 अगस्त को प्रस्तावित मान्यता प्राप्त यूनियन का चुनाव एक बार फिर टल गया है। हालांकि इस बार चुनाव के पहले मान्यता को लेकर नियम-कानून में भी कई फेरबदल किए गए हैं। इसका परोक्ष रूप से कम जनाधार वाले यूनियन को फायदा हो सकता है। इसे लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि कहीं भाजपा समर्थित संगठनों को फायदा पहुुंचाने की खातिर तो चुनाव नहीं टाला गया है।
रेलवे बोर्ड ने यूनियन के चुनाव में मान्यता के नियमों में कई स्टेज लागू कर दिए हैं। पहले कुल मत का 35 प्रतिशत या कुल पड़े मत का 30 प्रतिशत मत पाने वाला संगठन को मान्यता दी जाएगी। अब नियम बदलकर कुल मत का 30 प्रतिशत या कुल पड़े मतदान का 30 प्रतिशत, दोनों कंडीशन पूरा न होने पर कुल पड़े मत का 20 प्रतिशत भी अगर कोई संगठन पाता है तो उसे मान्यता दी जाएगी। देश स्तर पर दो फेडरेशन एनएफआईआर और एआईआरएफ को मान्यता प्राप्त है। इसी से सभी जोन में संबद्ध यूनियन मान्यता में है। भारतीय रेलवे मजदूर संघ से संबद्ध यूनियन मान्यता में पूरे देश में कहीं नहीं है। जबकि माना जाता है कि इस संगठन का जुड़ाव आरएसएस व भाजपा से है।
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छह संगठन इस बार होेंगे मैदान में
एनई रेलवे मजदूर यूनियन, पूर्वोत्तर रेलवे श्रमिक संघ, पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ, पूर्वोत्तर रेलवे कार्मिक यूनियन, एनई रेलवे मेन्स कांग्रेस, रेल वर्कर्स यूनियन (कई तकनीकी संगठन शामिल)।
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हर छह साल पर होता है चुनाव
मान्यता प्राप्त संगठन के लिए हर छह साल पर चुनाव होता है। पिछली बार वर्ष 2013 में चुनाव हुआ था। पूर्वोत्तर रेलवे में एनई रेलवे मजदूर यूनियन चुनाव जीती थी। इस संगठन को करीब 54 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। दूसरे स्थान पर पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ थी।
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