गोरखपुर। एमएड में पढ़ाई के लिए शिक्षकों के मानक को लेकर एनसीटीई के अधिकारियों में भी असमंजस की स्थिति है। इस कोर्स को कायम रखने के लिए डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर के मानक को पूरा करने में आ रही समस्या से निजात के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी की ओर से एनसीटीई को एक पत्र लिखा गया था।
इसे लेकर एनसीटीई का असमंजस सामने आया है। पत्र मिलने के बाद एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक ने दिल्ली में सदस्य सचिव को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगा है।
सदस्य सचिव को लिखे पत्र में क्षेत्रीय निदेशक ने इसे पॉलिसी मैटर बताते हुए गोरखपुर यूनिवर्सिटी के सामने स्थिति साफ करने को तो कहा है। इसके साथ ही इसे लेकर सामान्य तौर पर नियम बताने की बात भी कही है। कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि एनसीटीई के मानक के मुताबिक एमएड की 50 सीटों के लिए दो प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर और छह असिस्टेंट प्रोफेसर होने चाहिए।
लेकिन दिक्कत यह है कि डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसर का पद स्वीकृत ही नहीं है। जबकि गोरखपुर यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध दो कॉलेजों(सीआरडी पीजी कॉलेज और दिग्विजनाथ एलटी कॉलेज) में एमएड का कोर्स स्वीकृत है।
ऐसे में ये दोनों कॉलेज प्रोफेसर का मानक कैसे पूरा करेंगे? इस मानक के असमंजस को दूर करने के लिए एनसीटीई से दिशा-निर्देश मांगा गया था।लेकिन वहां भी इसे लेकर स्थिति साफ नहीं थी सो एनसीटीई ने सदस्य सचिव से पत्र लिखकर इस पर सलाह मांगी गई है।
कुलपति ने बताया कि जब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक एमएड प्रवेश प्रक्रिया लंबित ही रहेगी।