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भूमंडलीकरण से विकृत हो रही भाषा व संस्कृति : प्रो. प्रभाशंकर

Mon, 29 Feb 2016 01:30 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र विभाग में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन विचार विमर्श की रूप रेखा प्रस्तुत की गई और सेमिनार के महत्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। शाम को सांस्कृतिक संध्या में विद्यार्थियों ने समूह नृत्य, एकल गीत और नाटक का मंचन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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समापन भाषण में एकेडमिक स्टॉफ कालेज के पूर्व चेयरमैन व पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रभाशंकर पांडेय ने कहा कि भूमंडलीकरण की प्रक्रिया मीडिया एवं तकनीकी माध्यम से पूरी दुनिया में फैल रही है। इससे भाषा की प्रकृति बदल रही है और जब भाषा विकृत होती है तो संस्कृति भी विकृति हो जाती है। वर्तमान समाज में पूंजीवादी संस्कृति का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि पूंजीवादी संस्कृति में अस्मिता, भावनाओं एवं स्वयं व्यक्ति का अस्तित्व खतरे में है। अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इतिहास इस विषय की प्रस्तुति बाद में करेगा लेकिन समाजशास्त्रियों का दायित्व है कि वह समकालीन बदलाव पर चर्चा करें ताकि कमियों को रोका जा सके।

इस अवसर पर प्रो. राम प्रकाश, प्रो. वीके श्रीवास्तव, प्रो. कीर्ति पांडेय, डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. संगीता पांडेय, डॉ. शफीक अहमद, डॉ. अनुराग द्विवेदी आदि उपस्थित थे।
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