नगर निगम ने 19 साल से आय के स्रोत बढ़ाने का नहीं किया इंतजाम
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नगर निगम के नए भवन के भूमि पूजन पर नगर निगम प्रशासन को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने का निर्देश दिया। मुुख्यमंत्री का यह निर्देश यूं ही नहीं है। नगर निगम ने पिछले 19 साल से अपनी आय बढ़ाने का कोई इंतजाम नहीं किया। जिस अवस्थापना निधि से नगर निगम को अपनी आय का स्रोत बढ़ाना था, उस रकम को भी शहर में नाली, खड़ंजा बनाने में खर्च कर दिया गया। जबकि, शासनादेश के अनुसार अवस्थापना निधि से प्राप्त आय का 60 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रकृति और 40 प्रतिशत नगर निगम की आय के नए स्रोत विकसित करने का प्रावधान है।
सामान्य तौर पर नगर निगम को अवस्थापना निधि से हरेक साल करीब 17 करोड़ रुपये मिलते रहे हैं। हालांकि वर्ष 2018-19 में नगर निगम को मात्र 4.5 करोड़ रुपये ही मिले। प्रावधान के अनुसार नगर निगम को अवस्थापना निधि में मिले फंड का 40 प्रतिशत आय के संसाधनों को बढ़ाने के लिए खर्च करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मद में करोड़ों रुपये मिलने के बावजूद निगम की ओर से पिछले करीब 19 वर्षों में आय के नए स्रोत बनाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
नगर निगम की आय उसकी परंपरागत हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, सीवर टैक्स, विज्ञापन, रेंट, अस्थायी पार्किंग समेत कुछ अन्य संसाधनों तक सीमित रह गया है। ऐसे में अब नगर निगम के सामने ‘कंगाली’ सी स्थिति हो गई है। नगर निगम बोर्ड के एक साल पूरा होने के बावजूद पार्षदों द्वारा दिए गए वरीयता वाले प्रस्ताव भी पूरे नहीं कराए जा सके हैं।
अंतिम बार वर्ष 2000 में नगर निगम ने बनवाई थी दुकानें
शहर में नगर निगम की करीब 2100 दुकानें हैं। इन दुकानों को बनाने की शुरुआत 1983-84 से शुरू हुई थी। अंतिम बार 2000 में इन दुकानों का निर्माण कराया गया। सबसे पुरानी दुकानें गोलघर में 1969-70 में बनी हैं। इन दुकानों से नगर निगम को हरेक साल करीब 2.70 करोड़ रुपये की आय होती है।
1998 में बनाई गई थी अवस्थापना निधि के संबंध में नीति
प्रदेश में अप्रैल 1998 में अवस्थापना निधि के संबंध में नीति बनाई गई थी। अप्रैल 1999 में ही शासनादेश जारी कर इस निधि से 60 प्रतिशत कार्य स्थायी प्रकृति के करने के अलावा 40 प्रतिशत राशि नगर निगम की आय के लिए नए स्रोत विकसित करने का प्रावधान कर दिया गया। लेकिन नगर निगम की ओर से इस दिशा में पिछले 19 वर्षों से कोई भी काम नहीं किया गया है, जबकि नगर निगम को इस निधि के करीब 80 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
राज्य वित्त आयोग फंड में कमी के बाद बढ़ गई मुश्किल
पिछले वर्ष सरकार ने राज्य वित्त आयोग द्वारा फंड में करीब 77 करोड़ रुपये की कमी कर दिए जाने के वजह से नगर निगम के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। माली हालत दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने शहर के लोगों पर बोझ डाल दिया था, लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ है। नामांतरण टैक्स में तकरीबन 100 गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है।