फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आगा साहेबान का पुश्तैनी दुलदुल का जुलूस निकला

विज्ञापन
बसंतपुर में पूरी अकीदत के साथ आठवीं मोहर्रम पर निकला दुलदुल का जुलूस
विज्ञापन
आगा साहेबान का पुश्तैनी दुलदुल का जुलूस निकला
विज्ञापन

गोरखपुर। हजरत इमाम हुसैन अलै. की आलमे इंसानियत के लिए अजीम कुर्बानी की याद में आगा मुख्तार हुसैन की ओर से रविवार को शहर में दुलदुल का कदीमी जुलूस निकाला गया। जुलूस बसंतपुर स्थित उनके आवास से शुरू हुआ और नकी रोड, हैदर बाजार, उर्दू बाजार, घंटाघर, रेती चौक होता हुआ देर रात गीता प्रेस स्थित इमामबाड़ा आगा साहेबान इमामबाड़ रानी अशरफुन्निसा खानम में संपन्न हुआ।
विज्ञापन

इमामबाड़ा आगा साहेबान के आगा शानदार हुसैन उर्फ पैगाम अली ने बताया कि मातमी जुलूस में हजरत इमाम हुसैन के वफादार भाई और अलमबरदार ए कर्बला हजरत अब्बास रजि. के अलम और इमाम-ए-आली मुकाम की सवारी दुलदुल की शबीह निकाली गई। इसीलिए इसे दुलदुल का जुलूस कहा जाता है। इतिहास गवाह है कि जालिम यजीद सारे जुल्म करने के बाद भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका। इमाम हुसैन अलै. अपनी कुर्बानी देकर भी जीत गए और यजीद जुल्म की इंतेहा करने के बाद भी हार गया। इमाम हुसैन अलै. की यह कुर्बानी नाइंसाफी को खत्म करने के लिए दी थी। इसलिए हर साल मोहर्रम को सिर्फ मुसलमान ही नहीं मनाते बल्कि हर वह इंसान मनाता है जो इंसाफ पसंद है। जुलूस में शिया अजादारों ने इमाम हुसैन अलै. के गम में नौहाख्वानी, सीनाजनी, जंजीर और कमा का मातम कर अकीदत का इजहार किया, जुलूस में सभी समुदाय के लोग शरीक रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें