गोरखपुर में मेट्रो के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) और कांप्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान (व्यापक गतिशीलता योजना) तैयार करने के लिए जीडीए और राइट्स कंपनी में बुधवार को करार हुआ। कमिश्नर अनिल कुमार की अध्यक्षता में जीडीए उपाध्यक्ष एवं राइट्स कंपनी के जीएम (सिविल एवं शहरी परिवहन) ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
कमिश्नर अनिल कुमार ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रथम आगमन में यहां मेट्रो परियोजना की समीक्षा की थी। इसके ठीक एक माह बाद जीडीए और राइट्स के बीच करार हुआ। अपेक्षा है कि इसी तेजी से राइट्स भी काम आगे बढ़ाएगी। कमिश्नर ने बताया कि मेट्रो निर्माण के लिए पहला काम डीपीआर और कांप्रेहेंसिव मोबिलिटी प्लान तैयार करने का होता है। इसके लिए सरकार ने राइट्स कंपनी को एजेंसी तय किया है।
राइट्स एक सप्ताह के अंदर काम शुरू कर देगी और आठ माह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगी। राइट्स के 50 लोग इस काम को अंजाम देंगे। इसके अतिरिक्त कुछ और कर्मचारियों की सेवाएं राइट्स आउटसोर्सिंग के जरिए लेगी। डीपीआर पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से 10.50 लाख रुपये यानी कुल 3 करोड़ 15 लाख रुपये खर्च होंगे। वहीं सिटी मोबिलिटी प्लान के लिए राइट्स एक करोड़ रुपये लेगी।
जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने बताया कि राइट्स के कार्यालय के लिए प्राधिकरण में ही स्थान उपलब्ध कराया जा रहा है। शुरुआती कार्य के लिए 50 लाख रुपये भी कंपनी को दिया जा रहा है। मेट्रो परियोजना की नोडल एजेंसी जीडीए होगी। इस मौके पर जीडीए के सचिव महेंद्र कुमार मिश्र, उप निदेशक सूचना नवल कांत तिवारी, मुख्य अभियंता संजय कुमार सिंह भी मौजूद थे।
खंभों पर मेट्रो दौड़ाने पर होगा जोर
शहर में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना का डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी पाने वाली राइट्स कंपनी के जीएम (सिविल एवं शहरी परिवहन) प्रेम रंजन कुमार ने बताया कि हमारी टीम शहर की यातायात व्यवस्था, शहरियों के यात्रा व्यवहार, जमीन का उपयोग, पर्यावरण पर प्रभाव आदि बिंदुओं पर लोगों के बीच जाकर व्यापक पड़ताल करेगी। कोशिश होगी कि ज्यादातर जगहों पर मेट्रो को खंभों पर दौड़ाया जाए। इसकी वजह साफ करते हुए बताया कि भूमिगत व्यवस्था बनाने में खंभों के सापेक्ष ढाई से तीन गुना ज्यादा खर्च आता है। भूमिगत मेंटेनेंस समेत संचालन में भी ज्यादा खर्च होता है।
खंभों पर मेट्रो दौड़ाने में प्रति किलोमीटर 200 करोड़ होंगे खर्च
प्रेम रंजन ने बताया कि खंभों पर मेट्रो दौड़ाने के लिए प्रति किलोमीटर 200 करोड़ रुपये लागत आएगी। अगर भूमिगत व्यवस्था करनी पड़ी तो यह लागत 525 से 600 करोड़ तक पहुंच जाएगी। डीपीआर बनने के बाद स्पष्ट होगा कि कितने किलोमीटर ऊपर से तो कितनी दूर अंडरग्राउंड मेट्रो दौड़ाने की व्यवस्था होगी। डीपीआर बनने के बाद प्रस्ताव में कोई फेरबदल नहीं हो सकेगा।
3 करोड़ 65 लाख सरकार दे रही
गोरखपुर विकास प्राधिकरण की माली हालत को समझते हुए शासन मेट्रो परियोजना को लेकर उस पर बोझ नहीं बढ़ा रहा। शासन स्तर पर हुई बैठक में जीडीए की ओर से मेट्रो के डीपीआर के लिए 50 लाख देने की बात कही गई तो शासन ने खर्च होने वाली शेष रकम खुद देने की बात कही। डीपीआर और सीएमपी पर खर्च होने वाली रकम चार करोड़ 15 लाख में से तीन करोड़ 65 लाख रुपये सरकार कंपनी को देगी।