परम सत्य को पाने के लिए सत्य को ठुकराया जा सकता है: मोरारी बापू
गोरखपुर। शास्त्रों में कहा गया है कि परम सत्य की प्राप्ति करनी हो तो सत्य को छोड़ा जा सकता है क्योेंकि परमसत्य सत्य से भी बड़ा है। रामचरित मानस में माता कौशल्या पुत्र राम से पिता का वचन तोड़ने को कहती हैं। कौशल्या कहती हैं कि राजा दशरथ का वचन सत्य है लेकिन पुत्र राम, तू परम सत्य है। सैद्धांतिक, वाणि, शब्दों का सत्य तो सत्य है लेकिन परम सत्य इन सबसे कहीं ऊपर अटल, अजर, अमर है, बीज मंत्र है। जिसने बीज मंत्र समझ लिया उसने परम सत्य को समझ लिया। संत मोरारी बापू ने रामकथा के सातवें दिन शुक्रवार को मंत्र, बीज मंत्र, सत्य और परम सत्य शब्दों की राम चरित मानस के प्रकाश में आध्यात्मिक व्याख्या की।
संत मोरारी बापू ने शुक्रवार को रामकथा बाबा गोरक्षनाथ और उनके गुरु मत्स्येंद्र नाथ के बीच प्रश्नोत्तर प्रकरण से प्रारंभ की। गोरख संहिता को उद्धृत करते हुए बताया कि शिष्य गोरखनाथ गुरु मत्स्येंद्र नाथ से पूछते हैं कि मंत्र क्या है? गुणी किसको कहते हैं? सागर किसको कहते हैं? मोक्ष किसको कहते हैं? मुक्ति क्या है? शून्य क्या है और पूर्ण किसे कहते हैं?
गुरु मत्स्येंद्र नाथ ने बताया मंत्र बीज है। प्रश्न किया कि बीज क्या है। गुरु ने उत्तर दिया बीज ही मंत्र है। जिसने बीज मंत्र पा लिया उसने परम सत्य की अनुकंपा पा ली। ओशो कहते थे कि एक बीज पूरी धरती को पल्लवित कर सकता है उसी तरह बीज मंत्र में सब कुछ है। मंत्र अनेक हैं लेकिन राम से बड़ा कोई बीज मंत्र नहीं है। तुलसी दास रामचरित मानस में भगवान राम को जानकी नाथ से लेकर निज नाथ तक 32 नामों से पुकारते हैं। यह परम सत्य नाम ही मंत्र हैं। भगवान शिव ने माता पार्वती को कथा सुनाई और अंत में जब परम सत्य, बीज मंत्र की व्याख्या की बात आई तो व्याख्या नहीं की। बापू विनय पत्रिका का उद्धरण देते हुए बोले, ‘बीज मंत्र जपिए सदा जो जपे महेश, महामंत्र जपिए सोई जो जपे महेश।’ बीजों का बीज राम नाम, कृष्ण नाम, दुर्गा नाम है यह आपकी आस्था कि इष्ट कौन है। कबिरा बर्तन न्यारे न्यारे लेकिन पानी सबमें एक है ठीक उसी तरह बीज मंत्र राम नाम, कृष्ण नाम, दुर्गा नाम अलग हैं लेकिन सभी परम सत्य हैं।
कहत कठिन, समझत कठिन, साधन कठिन.....
परम सत्य शब्द की व्याख्या करते हुए संत मोरारी बापू ने उद्धव प्रकरण की व्याख्या की। बोले कि शब्द से कहीं सत्य नहीं मिलता है, सत्य स्वयं से मिलता है। कहत कठिन, समझत कठिन, साधन कठिन पद्य कहते हुए बोले, शब्द ब्रह्म है, निशंक है लेकिन शब्द छल भी है। शब्द भ्रम पैदा कर सकता है। परम सत्य कुछ और है और सत्य कुछ और। भगवत गीता का उद्धरण प्रस्तुत करते हुए बोले कि कंस ने बहन देवकी का ब्याह वासुदेव से किया। बहन बहनोई को विदा करने के लिए खुद उनके रथ का सारथी बना। रास्ते में उसे पता चला कि बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसका अंत करेगी तो रथ छोड़ कर भाग गया। कंस ने देवकी और वासुदेव से सभी संतानें उसे सौंपने की शपथ ली। वासुदेव की वह शपथ सत्य थी। जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ तो वासुदेव ने परम सत्य की रक्षा के लिए सत्य को त्याग दिया। यानी परम सत्य के लिए सत्य को छोड़ा जा सकता है। श्रद्धालुओं से बोले कि भ्रम में कभी कंस को अपना सारथी मत बनाना, कृष्ण को बनाना। कंस फरेबी है कृष्ण सत्य नहीं परम सत्य है। समाज की बागडोर तो कंसों के हाथ में है कृष्ण तो है ही नहीं। कृष्ण यदि तुम्हारे रथ का सारथी न बनें तो कृष्ण भजन को सारथी बनाओ, क्योंकि राम नाम, कृष्ण नाम, दुर्गा नाम परम सत्य है, बीज मंत्र है।
श्रीराम, जयराम, जय-जय राम
बीज मंत्र की व्याख्या करते हुए संत मोरारी बापू ने कहा कि मंत्र वह है जो वशीभूत कर ले। सामने वाले को, पति को, सरकार को, सत्ता को वशीभूत कर ले। वशीकरण की लंबी तांत्रिक मंत्र विद्या बताने के बाद उन्होंने कहा कि यदि मंत्रोच्चारण में जरा सी भी कमी रही तो आप फेल आधिक्य हुआ तो मंत्र फेल। तंत्र से सिद्ध किया हुआ कजरा वशीकरण भी कर सकता है लेकिन यदि गलत हुआ तो जिसे वश में करना है व्यक्ति स्वयं उसके वश में हो जाएगा। इससे बेहतर है कि मन की आंखों में भगवान राम के नाम का काजल लगाया जाए। फिल्मी गीत कजरा मोहब्बत वाला, अंखियों में ऐसा डाला कजरे ने ले ली मेरी जान, हाय मैं तेरे कुर्बान, दुनिया है मेरे पीछे लेकिन मैं तेेरे पीछे अपना बना ले मेरी जान, श्रीराम, जयराम, जय जय राम को राम भक्ति में पिरोया तो पंडाल में सभी श्रद्धालु भी उनके साथ श्रीराम, जय राम, जय जय राम गाने लगे।
प्रज्ञा चोरी है बड़ा अपराध
रामकथा सुनाते हुए संत मोरारी बापू ने कई शायरों के शेर, ओशो के विचार, संत तुकाराम की वाणी और कवियों की रचनाएं प्रस्तुत कीं। बोले अक्सर देखने में आता है कि लोग जिस विद्वान की रचना प्रयोग करते हैं उसका नाम नहीं लेते, यह प्रज्ञा की चोरी है। प्रज्ञा चोरी बेईमानी है, आपमें ईमान होना चाहिए। भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा दिया। भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने इसमें जय विज्ञान जोड़ा, संत मोरारी इसमें जय ईमान जोड़ता है। यानी विद्वान की पंक्तियों का ईमानदारी से उल्लेख किया जाना। इसके बाद उन्होंने देखे और दीवाना कर दे शायद उसको जादू आए, कांटों से भी खुशबू आए शाखों को तुम क्या छू आए को आध्यात्मिकता के साथ प्रस्तुत करते हुए कहा कि शुद्ध सात्विक हृदय से की गई पूजा हर इंद्री को महकाती है।
सत्य कहीं से मिले उसे ग्रहण करो
रामकथा के दौरान संत मोरारी बापू ने कहा कि सत्य कहीं से मिले उसे ग्रहण करना चाहिए। जो तुम्हारे लिए जरूरी हो उसे ग्रहण करो और बाकी छोड़ दो। प्रभु यीशू का हवाला देते हुए बोले कि जीसस क्राइस्ट ने कहा था कि आप दरवाजे पर दस्तक दीजिए दरवाजा खुलेगा जरूर। शायर राशिद की गजल के दो शेर प्रस्तुत किए। राशिद किए सुनाएं गली में तेरी गजल, उनके मकां का कोई दरीचा खुला न था। पत्थर सुलग रहे थे कोई नक्शे पा न था, हम जिस तरफ चले थे उधर रास्ता न था। बोले तुम अपने दरीचे खुले रखो और सत्य को ग्रहण करो।
चंद्रमा गुरु नहीं पत्थर है
संत मोरारी बापू ने बताया कि अधिकतर लोग चंद्रमा को गुरु मानते हैं। चंद्र को गुुरु कहना अच्छा है क्योंकि वह शीतल प्रकाश देता है और जलाता नहीं। यह अर्ध सत्य है। चंद्रमा गुरु नहीं ग्रह है, इस ग्रह से पत्थर के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। बाबा रामतीर्थ का प्रकरण सुनाया। बताया स्वामी रामतीर्थ लाहौर के बाजार में टहल रहे थे। एक बच्चा रो रहा था पत्नी ने पति को उलाहना दी कि बच्चे को चुप नहीं करवा पा रहे हो। पति ने कहा कि बच्चा अपनी परछाई पकड़ना चाहता है। वह जैसे ही उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़ता है परछाई भी आगे बढ़ जाती है यह संभव नहीं इसलिए बच्चा रो रहा है। इस पत्नी ने बच्चे को गोद में लिया और बच्चे कहा कि वह अपनी चोटी पकड़ ले। बच्चे ने चोटी पकड़ी तो परछाई में भी चोटी पकड़ ली। जीवन भी यही है खुद को पकड़ो जग पकड़ा जाएगा, यह मंत्र राम है।