मोहर्रम और दुर्गा पूजा को एक साथ शांति और सद्भाव के साथ संपन्न कराने के लिए सोमवार को इमामबाड़ा इस्टेट में इमामबाड़ा और इमाम चौकों के मुतवल्लियों व शहर के जिम्मेदार लोगों की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता करते हुए इमामबाड़ा इस्टेट के सज्जादानशीन अदनान फर्रुख शाह मियां साहब ने अपील की कि मोहर्रम पर इस्लामी झंडे सिर्फ इमामबाड़ों और इमामचौकों पर पर ही लगाए जाएं और मोहर्रम समाप्त होते ही यह झंडे उतार लिए जाएं।
उन्होंने कहा कि मुतवल्ली व जिम्मेदार हजरात लाठी, डंडा, अलम को जुलूस से हटकर कहीं और न ले जाएं। मियां साहब ने बताया कि डीजे पर प्रतिबंध है इसलिए कोई भी मुतवल्ली इसका प्रयोग न करे। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक जुलूस में दो लाउडस्पीकर ही लगाएं। इस संबंध में प्रशासन से वार्ता हो चुकी है। मियां साहब ने मोहर्रम एवं दुर्गापूजा के अवसर पर सभी धर्म के लोगों से अपील की कि एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करते हुए अपने-अपने त्योहारों को आस्था के साथ मनाएं।
बैठक की शुरुआत हाफिज अब्दुर्रहमान ने तिलावते कलाम पाक से की। उसके बाद मौलाना शाकिर अली सलमानी, इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी के अध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद, कौमी इकजहती के सुल्तान अहमद, हांसूपुर के मुतवल्ली अशफाक अहमद, एजाज अहमद ने मोहर्रम के जुलूस को अमन के साथ सम्पन्न कराने की सभी से अपील की और अपनी-अपनी समस्याओं से मियां साहब को अवगत कराया और उनसे अंतिम निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि मियां साहब जो भी फैसला लेंगे, उसे मानने के लिए वे तैयार हैं। इस दौरान जुल्फेकार अहमद, मंजूर आलम, महफूज आलम, आफताब अहमद, शमशाद पहलवान, जमीन अहमद, सैयद इश्तेयाक अहमद, शेख शकील अहमद, नौशाद खान, शकील शाह, नुरुल हसन अंसारी आदि मौजूद रहे। संचालन महबूब सईद हारिस ने किया।