इंसेेफेलाइटिस के इलाज के लिए दवाओं और बेड की कमी की समस्या से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था को प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री राधेश्याम सिंह संतोषजनक बताया है। वह बुधवार को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण कर रहे थे। हालांकि इस दौरान उन्होंने एक बेड पर दो मरीजों के होने पर आपत्ति भी जताई। उन्होंने कहा कि असाध्य रोगों के इलाज और दवाओं के मद में कॉलेज को पांच-पांच करोड़ रुपये दिए गए हैं। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अभी सिर्फ 50 लाख रुपये ही असाध्य रोगों के मद में मिले हैं।
बुधवार को खरीफ गोष्ठी में शामिल होने के राज्यमंत्री शहर में आए थे। गोष्ठी के बाद वह मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। उनके साथ डीएम ओएन सिंह और सीडीओ मन्नान अख्तर भी थे। वह सीधे इंसेफेलाइटिस वार्ड के आईसीयू में गए। इस दौरान उन्होंने मरीजों के इलाज के बाबत डॉक्टरों से जानकारी ली। डॉक्टरों ने बताया कि वार्ड में इस समय 81 मरीज भर्ती हैं। मंत्री ने मरीजों के तीमारदारों से भी बात की। राज्यमंत्री ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद हैं। अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है। दवा खरीदने के लिए पांच करोड़ रुपए इस वर्ष शासन ने दिए हैं। इसके अलावा असाध्य रोगों के मद में भी कालेज को पांच करोड़ रुपए मिले हैं।
उन्होंने दावा किया कि किसी भी मरीज के तीमारदार को बाहर से दवा नहीं खरीदनी पड़ रही है। मरीजों की सुविधा के लिए इंसेफेलाइटिस वार्ड में 24 घंटे दवा स्टोर संचालित होता है। इस दौरान राज्य मंत्री के सामने बर्न वार्ड की दुर्दशा का मामला भी सामने आया। उन्होंने अनुरक्षण के मद से बर्न वार्ड में मरम्मत कराने व पंखा लगाने का निर्देश दिया।