भुगतान न होने के चलते आक्सीजन सप्लाई ठप होने से रोकने के लिए कॉलेज प्रशासन जुट गया है। कॉलेज प्रशासन की यह तेजी अमर उजाला में प्रकाशित उस खबर के बाद आई है, जिसमें 64 लाख के बकाए के चलते आक्सीजन सप्लाई रोक देने को लेकर कंपनियों की ओर से विचार करने की बात कही गई थी। कॉलेज प्रशासन ने बातचीत के लिए कंपनी प्रबंधन को बुलाया है।
कॉलेज में आक्सीजन की सप्लाई के दो माध्यम हैं। एक है लिक्विफाइड ऑक्सीजन, जो पाइप लाइन के सहारे पहुंचाया जाता है और दूसरा माध्यम सिलिंडर से सप्लाई का। लिक्विफाइड आक्सीजन की सप्लाई पुष्पा गैस एजेंसी के हवाले है जबकि सिलिंडर आक्सीजन सप्लाई मोदी गैस एजेंसी कर रही है। बजट की कमी के चलते लिक्विफाइड आक्सीजन का बकाया 44 लाख हो गया है जबकि सिलिंडर का बकाया 22 लाख है। इसे लेकर दोनों ही कंपनियाें ने सप्लाई रोक देने पर विचार करना शुरू कर दिया है। जब इसकी जानकारी अमर उजाला को हुई तो शुक्रवार के अंक में ‘मरीजों के आक्सीजन पर बकाए का खतरा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। इसको संज्ञान में लेते हुए कॉलेज के नवागत एसआईसी डॉ. एमक्यू बेग ने शनिवार को दोनों ही कंपनियों की फाइल मंगाई और अध्ययन किया।
अध्ययन के बाद दोनों कंपनियों के प्रबंधन को उन्होंने अगले सप्ताह का बुलावा भेजा है। कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा का कहना है कि सप्लाई ठप नहीं होने दी जाएगी। बकाए के कुछ हिस्से का भुगतान करके कंपनियों को सप्लाई जारी रखने के लिए कहा जाएगा। बाकी भुगतान भी किस्तों में जल्द से जल्द किए जाने की कोशिश की जाएगी।