‘घर बनवाने के पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं’
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। सेमिनार के दौरान आईआईटी, एनआईटी के शिक्षक समेत कुछ शोध छात्रों ने शोधपत्र पढ़े।
‘रिसेंट एडवांसेज इन सिविल इंजीनियरिंग’ विषय पर आयोजित सेमिनार के अंतिम दिन इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईईसी) लखनऊ के शिक्षक प्रो. एमजेड खान ने मकान निर्माण से पहले मिट्टी की जांच को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि भले ही भूकंप आशंकित क्षेत्र के मद्देनजर देश चारों जोन में बांटा गया है, लेकिन मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर एक ही जोन में किसी भी निर्माण के लिए जांच बहुत जरूरी है। एक ही जोन में कुछ क्षेत्रों की मिट्टी बलुई होती है तो दूसरी जगह की चिकनी। दोनों के लिए भार क्षमता अलग-अलग होती है, क्योंकि बलुई मिट्टी वाले क्षेत्र में जमीन के अंदर पानी की मात्रा होती है और भूकंप की स्थिति में पानी हिलने से किसी भी निर्माण के ध्वस्त होने का खतरा काफी ज्यादा होता है। जांच के बाद ऐसी जमीन पर निर्माण को तकनीकी रूप से अलग ढंग से बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि गोरखपुर के सेस्मिक जोन चार में होने की वजह से यहां मिट्टी की जांच बहुत जरूरी है। क्योंकि लिक्वीफेक्शन की स्थिति में मकान के निर्माण में काफी सावधानी बरतने की जरूरत पड़ती है। जांच से इसका आसानी से पता चल जाता है। सेमिनार के सह संयोजक डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि सेमिनार के दौरान कुल 62 शोधपत्र आए। इनमें से आईआईटी बीएचयू के डॉ. देवेंद्र मोहन, एमएन एनआईटी इलाहाबाद के प्रो. एके सिंह समेत शोध छात्रों के कुल 10 शोधपत्र पढ़े गए। कार्यक्रम के दौरान एमएमएमयूटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएम अली जावेद, श्रीराम चौरसिया समेत अन्य मौजूद रहे।