सांसद महंत आदित्यनाथ ने एम्स के मुद्दे पर एक बार फिर मुख्यमंत्री पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा धन आवंटन के बाद भी प्रदेश सरकार द्वारा भूमि उपलब्ध न कराना पूर्वांचल और पश्चिमी बिहार की जनता के साथ विश्वासघात है। यहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में आए दिन लोग दम तोड़ते हैं। सपा सरकार उनकी भावनाओं पर कुठाराघात कर रही है।
वह शनिवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि एम्स के लिए भूमि का आवंटन कर दिया गया है, जबकि उस भूमि का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। केंद्र सरकार ने 1600 करोड़ की धनराशि आवंटित करने के साथ ही हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी को बाउंड्रीवाल का टेंडर दे दिया। वह फर्म यहां एक सप्ताह पहले कार्य कराने के लिए आई भी, पर अधिकारियों ने यह कहकर मना कर दिया कि जमीन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस नाते उस पर कोई कार्य नहीं कराया जा सकता।
महंत ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि वह जनता को गुमराह करने वाला बयान क्यों दे रहे हैं। वह जान बूझ कर विवादित जमीन क्यों दे रहे हैं।
वहीं, बिहार में एक पत्रकार की गोली मारकर की गई हत्या पर सांसद आदित्यनाथ ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया। कहा कि पत्रकार की सरेआम गोलियों से भून दिया जाता है। एमएलसी के बेटे को पास नहीं देने पर व्यापारी के बेटे को गोलियों से भून दिया जाता है। यदि यह सुशासन है तो कुशासन किसे कहा जाएगा। नीतीश कुमार पहले अपराध मुक्त बिहार की बात करें फिर संघ मुक्त और शराब मुक्त भारत का सपना देखें। आदित्यनाथ ने शनिवार को यह बातें पत्रकारों के एक सवालों के जवाब में कही।
उन्होंने कहा कि बिहार का सुशासन अराजकता का प्रतीक बन गया है। वहां पर हर रोज बड़ी वारदात होती रहती है। वहां के मुख्यमंत्री स्वयं अपने अंदर झांक कर देखें। वह अपराध और अराजकता मुक्त बिहार बनाए। फिर आगे की सोचें। साध्वी प्राज्ञा के सवाल पर कहा कि कांग्रेस का कृत्य किसी देशद्रोह से कम नहीं है। सेना के खुफिया यूनिट के अधिकारी के घर में आरडीएक्स रखने का कार्य एटीएस ने किया था। यह सब कांग्रेस के कार्यकाल में हुआ था।
कांग्रेस को देश की जनता से भगवा आतंकवाद का नाम देने लिए माफी मांगना चाहिए। जो कार्य हूजी , सिमी जैसे संगठनों ने किया उसको हिंदू संगठनों के माथे पर मढ़ दिया गया। साध्वी प्राज्ञा और कर्नल पुरोहित के मामले में एनआई ने 2014 तक जांच किया, पर कोई सबूत नहीं पेश कर पाई। अब जब इन लोगों को क्लीन चिट मिल गया तो कांग्रेस के लोग अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं।