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गुजरात से एक महीने में गोरखपुर खाद कारखाना पहुंची हैं मशीनें

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गोरखपुर फर्टिलाईजर पहुचा मुंबई से आया खाद कारखाने का मशीन।
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 हिंदुस्तान उवर्रक रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) द्वारा बनाए जा रहे खाद कारखाना के लिए गुजरात से भारी-भरकम मशीनों को लेकर चले बड़े वाहनों को कारखाना तक पहुंचने में करीब एक महीने का समय लग गया।

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पूजा-अर्चना के बाद मंगलवार की सुबह चार वाहन खाद कारखाना परिसर में दाखिल हुए जबकि कलपुर्जों से लदा एक वाहन अभी भी गीडा स्थित तेनुआ टोल प्लाजा के पास फंसा है। इन वाहनों को शहर की सीमा से कारखाना तक पहुंचने में ही आठ घंटे लग गए।

एचयूआरएल के सीनियर मैनेजर सुबोध दीक्षित ने बताया कि कुल 62 गाड़ियों से प्लांट के कलपुर्जे पहुंचने हैं। इनके आने का सिलसिला शुरू हो गया है। कुछ गाड़ियां बाराबंकी, फैजाबाद, प्रतापगढ़ के पास फंसी हैं। इनके गोरखपुर सीमा पर पहुंचने के बाद तेनुआ टोल प्लाजा पर फंसे वाहन को भी एक साथ खाद कारखाना में प्रवेश कराया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, बिजली निगम, यातायात विभाग, नगर निगम और लोनिवि आदि विभागों के संयुक्त प्रयास से सोमवार की देर रात से कलपुर्जे लदे वाहन कारखाना तक लाए गए। देर होने की वजह से एक वाहन नहीं आ सका।

मंगलवार की सुबह पूजा अर्चना के बाद इन वाहनों को गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर कार्पोरेशन के चेयरमैन सुजीत गुलाटी व एचयूआरएल के एमडी अरुण कुमार गुप्ता ने हरी झंडी दिखाकर कारखाना परिसर में रवाना किया। सीनियर मैनेजर सुबोध ने बताया कि सभी मशीनें और उनके कलपुर्जे गुजरात से लाए जा रहे हैं।

62 में से 57 वाहन सड़क मार्ग से जबकि बाकी की मशीनें व कलपुर्जे जल मार्ग से लाए जाएंगे जो छपरा के गौरीगंज के पास उतारे जाएंगे। वहां से पांच वाहनों में उन्हें यहां लाया जाएगा। बताया कि खाद कारखाना में ज्यादातर मशीनें अपने ही देश में बनी हैं जबकि कुछ मशीनें देश के बाहर से मंगाई जाएंगी। जो मशीनें और कलपुर्जे मंगलवार को कारखाना पहुंचे उन्हें गोदरेज कंपनी ने बनाया है।
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इस दौरान एचयूआरएल के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट विष्णु कांत दीक्षित, सीनियर मैनेजर सुबोध दीक्षित, टोयो के आरसीएम एस चंद्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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