कांपते हाथ, डबडबाई आंखें और चेहरे पर शहादत का गौरव
गोरखपुर। देश की सीमाओं की सुरक्षा में प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की वीरांगनाएं जब सम्मानित हो रही थीं तो बार-बार ऐसे लम्हे आए जब माहौल बेहद भावुक उठा। वीरांगनाओं की आंखें नम थीं। शहीदों के घरवाले स्मृतियों में खोए थे, मगर समानता थी कि सभी के चेहरों पर शहादत गर्व के भाव थे।
अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ के तहत होटल क्लार्क्स ग्रैंड में आयोजित ‘वीरांगना सम्मान समारोह’ का यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था। मंच पर कांपते हाथों से वीरांगनाएं जब सम्मान हासिल कर रहीं थीं ,तो समारोह स्थल वंदेमातरम और भारत माता के जयघोष से गूंज उठा। इस अद्भुत पल का साक्षी बना हर शख्स भावुक हो गया। सबके जेहन में कारगिल युद्ध, ऑपरेशन विजय और बच्चों को आतंकियों से मुक्त कराने जैसी घटनाएं कौंधने लगी। समारोह में भारत माता के वीर सपूतों की ऐसी भी वीरांगनाएं मौजूद थीं, जिनका सुहाग उजड़ गया था, बावजूद उन्होेंने बेटे को देश की सेवा की खातिर सरहद पर भेजा। जब ऐसे वीरांगनाओं को मंच पर बुलाया गया तो तालियों की गड़गड़ाहट से जोरदार अभिवादन हुआ। वहां मौजूद हर कोई सम्मान में खड़ा हो गया। एक-एक कर 22 शहीदों की वीरांगनाओं एवं परिवारवालों का सम्मान होता रहा और अभिवादन का सिलसिला भी बदस्तूर चलता रहा।
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पति खोया है अब बेटे को भेजा है सेना में
लांस नायक राजमणि खजनी की वीरांगना इंद्रावती मौजूद तो समारोह में मौजूद थीं, लेकिन मानो उनका मन कहीं और था। कुरेदने पर बोलीं, पति पर गर्व है। इतना कहते ही आंखों में आंसू आ गए। खुद को किसी तरह संभाला। बोलीं कि कभी सोचा भी नहीं था कि इतना सम्मान मिलेगा। आज उनका नाम दुनिया लेती है यही सबसे बड़ा सम्मान है। वीरांगना सुंदरी देवी भी नम होती आंखों को बार-बार पोंछ कर खुद को संभालती दिखीं। गर्व से कहा, देश के लिए पति कुर्बान किया है, अब बेटे भी देश सेवा में दिए हैं। शुभा शुक्ला के शांत चेहरे पर पति की शहादत का गर्व साफ नजर आ रहा था। बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो बोलीं, पति साहब शुक्ला, बच्चों को बचाते हुए शहीद हुए। उनके जाने का मलाल तो जिंदगी भर रहेगा। उनकी शहादत पर गर्व है।