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बिना ब्रांड के बन रही थी मैक्रोनी एवं सेवई

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बिना ब्रांड के बन रही मैक्रोनी, सेंवई जब्त
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गोरखपुर। शहर में विभिन्न खाने-पीने के सामान को बनाने में मानकों का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। इन्हें बेचने में भी भारी अनियमितता बरती जा रही है। ज्यादातर सामग्री में निर्धारित नियमों की जबर्दस्त अनदेखी की जा रही है। रविवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन को छापे में बिना ब्रांड के मैक्रोनी, सेंवई और बूंदी बनती हुई मिली। करीब साढ़े आठ लाख रुपये की इस खाद्य सामग्री को विभाग के अधिकारियों ने जब्त कर लिया। वहीं खराब क्वालिटी वाले मसालों, कोल्ड ड्रिंक्स, गुलाब जामुन समेत अन्य सामान को नष्ट कर दिया गया। कुछ के नमूने भी लिए गए।
असिस्टेंट कमिश्नर श्रवण कुमार मिश्र के नेतृत्व में टीम ने रविवार को शहर एवं आसपास के इलाकों में जांच अभियान चलाया। सहजनवां गीडा सेक्टर 13 में 5.77 लाख रुपये का 19,250 किलोग्राम मैक्रोनी और 9200 रुपये की 298 किलोग्राम सेंवई सीज की गई।
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मुंडेरी चक मेसर्स विनोद के सेवई कारखाना, मुंडेरी चक पर आशीष विश्वकर्मा के बूंदी कारखाना, तुर्कमान बर्फखाना के अरुण शुक्ला की नमकीन फैक्टरी, अलहदादपुर में काशी स्वीट्स एंड बेकर्स और अंबे स्वीट्स से नमूने लिए गए। इसमें 1.80 लाख रुपये की 30 क्विंटल बूंदी, 14 हजार रुपये की चार क्विंटल सेवई, 72 हजार रुपये की 3.6 क्विंटल फोंफी सीज की गई। गोरखपुर में छह खाद्य सामग्रियों के नमूने लेने के अलावा दो हजार के मसाले, 7200 रुपये के कोल्ड ड्रिंक्स, दो किलो गुलाब जामुन, तीन किलो बर्फी, सात किलो बेसन के लड्डू को नष्ट किया। जांच के दौरान मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार, इंद्रेश प्रसाद, कृष्णचंद्र, प्रतिमा त्रिपाठी, अरुण शुक्ला, राधेश्याम वर्मा शामिल रहे।
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