गोरखपुर। दीक्षांत समारोह सप्ताह के क्रम में शुक्रवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन के प्रेक्षागृह का मंच नामचीन कवियों से सजा। अखिल भारतीय काव्य महोत्सव के नाम से सजी कवियों की इस महफिल में काव्य रचनाओं का हर रंग देखने को मिला। मोहब्बत के अफसाने थे तो देशक्त्ति के तराने भी। इलाहाबाद से आये कवि अखिलेश ने तो दोनों की जुगलबंदी पेश कर लोगों के दिल में गहरी पैठ बना गए। अखिलेश ने ‘मोहब्बत के तराने जब लबों तक नहीं आयेंगे तो हम देश भक्ति के गीत कैसे गायेंगे’ इस जुगलबंदी की बानगी रही।
काव्य महोत्सव की शुरुआत कुलपति प्रो. अशोक कुमार के गजल ‘घर में अब केवल उजाले जायेंगे’ से हुई। उसके बाद लखनऊ के डॉ. निर्मल दर्शन ने शुरू की मोहब्बत के पैगाम का आगाज। ‘प्यार के एक पल के लिए उम्र भर आजमाया गया’ गीत से उन्होंने लोगों के बीच पहुंचने की कोशिश की। कवियत्री सुमन दुबे की बारी आई तो उन्होंने शृृंगार रस में सभी को इस कदर डुबोया कि लोग आनंदित हो उठे। ‘मैं सुबह की रानी हूं, कही शाम न हो जाऊं’ जैसी रचनाओं का श्रोताओं ने खूब लुत्फ उठाया।
सहारनपुर से आए नदीम शाद ने ‘किसी भी शय में तेरे हुस्न सा जलाल नहीं’ सुनाकर दास्ताने मोहब्बत की परंपरा को कुछ इस तरह आगे बढ़ाया कि लोगों ने बार-बार सुनने की अपील की। अब जब मोहब्बत थी तो बेवफाई पर रचना भी लाजिमी थी। लोगों की यह ख्वाहिश बाराबंकी के गजेंद्र सिंह प्रियांशु ने पूरी की। ‘इतने निर्मोही सजन कैसे हो गये’ जैसी रचनाओं से उन्होंने जहां मोहब्बत की चर्चा को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश की। कानपुर के सुरेश अवस्थी, चंडीगढ़ की सविता असीम, दिल्ली की सरिता शर्मा, लखनऊ के वेदव्रत वाजपेयी, कानपुर की कमल मुसद्दी, सीवान के सुनील कुमार तंग और बरेली के राहुल अवस्थी ने भी अपनी-अपनी जोरदार रचनाओं से सामाजिक व राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाये और लोगों को कुर्सी पर जमे रहने के लिए मजबूर किया। आयोजन की शुरुआत में महोत्सव के संयोजक प्रो. लालजी त्रिपाठी ने आयोजन का औचित्य बताया। संचालन मशहूर शायर डॉ. कलीम कैसर ने तो आभार ज्ञापन डॉ. सुषमा पांडेय ने किया।
संस्कृति में निहित करुणा सभ्य बनाती है
गोरखपुर। 34वें दीक्षांत समारोह के व्याख्यानमाला के क्रम में शुक्रवार को ‘पूरा वैदिक कोशल’ पर प्रो. माता प्रसाद त्रिपाठी का व्याख्यान हुआ। व्याख्यान में प्रो. त्रिपाठी ने भारतीय संस्कृत के उषा काल सैन्धव-सरस्वती क्षेत्र न मानकर कोशल-मगध क्षेत्र को बताया। उन्होंने पुरातात्विक स्थल लहुरादेवा से झूसी तक के पुरावशेषों को प्रस्तुत किया।
प्रो. त्रिपाठी ने वहां से प्राप्त सत्य एवं अहिंसा, अपरिग्रह और करुणा जैसे तत्वों का मूल उन्होंने इसी क्षेत्र को बताया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र की संस्कृति एवं परंपरा के मूल में निहित करुणा जो संपूर्ण संसार को सभ्य एवं सुसंस्कृत बना सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की संस्कृति उस राष्ट्र की आत्मा होती है। संस्कृति राष्ट्र की आत्मा है। देश की सफलता संस्कृति एवं युवाओं पर निर्भर है। संचालन डॉ. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने और आभार ज्ञापन प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने किया। विषय का औचित्य बताते हुए प्रो. राजवंत राव ने आगंतुकों का स्वागत किया।
स्वागत से अभिभूत हुए पूर्व कुलपति
गोरखपुर। दीक्षांत सप्ताह के क्रम में शुक्रवार को पूर्व कुलपतियों का सम्मान समारोह आयोजित था। आयोजन में सम्मान के लिए सपत्नीक आए पूर्व कुलपति प्रो. बीएम शुक्ला और प्रो. एसएल मलिक लंबे समय बाद परिसर में पहुंचे तो लोगों की आत्मीयता देख भाव-विभोर हो उठे। वर्तमान कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने दोनों पूर्व कुलपतियों को मानपत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जबकि दोनों पूर्व कुलपति की पत्नियों का सम्मान वर्तमान कुलपति की पत्नी प्रो. मधु कुमार ने किया। चूंकि प्रो. एसएल मलिक का शुक्रवार को ही जन्मदिन था, सो उन्हें उसके लिए भी लोगों ने हार्दिक बधाई दी और लंबी उम्र की कामना की। दोनों पूर्व कुलपतियों ने इस अवसर पर यूनिवर्सिटी से जुड़े अपने अपने यादगार संस्मरणों को साझा किया। सम्मान समारोह का संचालन डॉ. चंद्रभूषण अंकुर ने किया।
दीक्षांत समारोह का रिहर्सल आज
गोरखपुर। दीक्षांत समारोह के रिहर्सल के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कार्य परिषद व विद्या परिषद के सदस्यों, गोल्ड मेडलिस्टों और यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को शनिवार को आमंत्रित किया है। रजिस्ट्रार प्रभाष द्विवेदी की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक रिहर्सल प्रक्रिया यूनिवर्सिटी के खेल मैदान पर शाम तीन बजे से शुरू होगी।
पेंटिंग प्रदर्शनी का शुभारंभ आज
गोरखपुर। दीक्षांत सप्ताह समारोह के आयोजन की श्रृंखला में शनिवार को पेंटिंग प्रदर्शनी ‘त्रिपथगा’ का आयोजन किया गया है। अमृता कला वीथिका में होने वाली इस प्रदर्शनी का शुभारंभ सुबह 11 बजे कुलपति प्रो. अशोक कुमार करेंगे। संयोजक डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि इस प्रदर्शनी मेें डॉ. भारत भूषण, डॉ. निशा जायसवाल और डॉ. कुमुद सिंह के चित्र प्रदर्शित किये जायेंगे।
दीक्षांत समारोह में कुछ यूं होगा इंतजाम
विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश जो सुबह 10 तक खुला रहेगा। उसके बाद साढ़े 10 बजे तक प्राचीन इतिहास विभाग द्वार खुला रहेगा।
पंडाल के ब्लॉक-दो बैठने के लिए शिक्षक प्रवेश द्वारा संख्या तीन से सवा 10 बजे तक प्रवेश कर सकेंगे।
ब्लॉक-दो में शिक्षकों के बाद कर्मचारियों के बैठने का इंतजाम है।
पार्किंग व्यवस्था विज्ञान संकाय गैलरी रोड व स्टेडियम ग्राउंड में की गई है।
मजीठिया भवन में दोपहर का भोजन आयोजित है।
शिक्षकों व कर्मचारियों को आमंत्रण व परिचय पत्र साथ लाना होगा।