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साक्षात्कार: सीएम योगी बोले- अब जाति-धर्म के नाम पर नहीं बहकेगा मतदाता 

Wed, 15 May 2019 05:09 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि मतदाता को अब जाति-धर्म के नाम पर बहकाना संभव नहीं। संसदीय चुनाव हों तो लोग जाति-धर्म नहीं, विकास और दुनिया में मजबूत देश की तरह उभरता भारत दे सकने वाली सरकार चुन रहे होते हैं। देश के प्रधानमंत्री का चुनाव करते हैं। मतदान के छह चरण के बाद मुख्यमंत्री से शरद मौर्य ने बातचीत की... 

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सवाल- एनडीए को कितनी सीटें मिलेंगी?
जवाब- छह चरणों के रुझान बताते हैं कि एनडीए को करीब 400 सीटें मिलेंगी। अकेले भाजपा 300 सीटें जीतेगी। यूपी में 74 प्लस का हमारा लक्ष्य है। इस बार भाजपा अमेठी, आजमगढ़, कन्नौज और बदायूं सीट भी जीत रही है।

सवाल- पूर्वांचल में छठे चरण में मतदान कम हुआ, इसका नुकसान किसे होगा?
जवाब- मतदान करीब एक फीसदी बढ़ा है। दरअसल, मतदाता सूची में अब भी गड़बड़ है। मतदाता सूची नए सिरे से बनाने और इसे आधार कार्ड से जोड़ने की जरूरत है। हमने पहल भी की लेकिन प्रदेश के निर्वाचन आयोग ने रुचि नहीं ली। जो लोग पारदर्शिता नहीं चाहते हैं, वे आधार कार्ड का विरोध करेंगे, जैसा कि ईवीएम का कर रहे हैं। विपक्ष ने जिसे सिर्फ वोट बैंक माना था, वह ठगा महसूस कर रहा है। यही मतदाता घर से नहीं निकला। इससे विपक्ष में बेचैनी है।
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सवाल- भाजपा ने तीन तलाक का मुद्दा उठाया। इससे पार्टी को कुछ फायदा मिलेगा?
जवाब- सुबह ही शहर के एक प्रतिष्ठित मुस्लिम मिलने आए थे। बोले- आपका कार्यक्रम कराना चाहते हैं। इसकी वजह पूछने पर वह बताने लगे कि उनके मुहल्ले के 150 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास मिला है। आजादी के बाद से यह पहला मौका है, जब किसी ने मुस्लिमों को झोपड़ी से पक्का मकान देने की बात सोची। वे कब तक सिर्फ वोट बैंक बने रहेंगी, ये मुस्लिम समाज को खुद सोचना होगा। महिला सशक्तीकरण आधी आबादी को न्याय बिना पूरा नहीं होगा। तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथा रुकनी ही चाहिए। इस दिशा में अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहल की। इसी वजह से मुस्लिम महिलाओं का रुझान भी उनकी ओर है। 

सवाल- अब पूर्वी यूपी ही बाकी है। जाति की राजनीति से भाजपा को खतरा नहीं?
जवाब- आम जनता प्रधानमंत्री मोदी के नाम और काम पर मतदान कर रही है। पार्टी और प्रत्याशी गौण हैं। आवास, शौचालय, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान जैसी योजनाओं का लाभ देने में मोदी जी ने जाति-मजहब, क्षेत्र या भाषा का भेद नहीं किया। अब ये लोग भी इस भाव से ऊपर उठकर मोदी जी को वोट दे रहे हैं। विकास के लाभ ने जातिवाद की दीवार ढहा दी है।

सवाल- गोरखपुर में उपचुनाव में टूटी दीवारों की मरम्मत हो गई है?
जवाब- उपचुनाव से आकलन मत कीजिए। उपचुनाव आम चुनाव से अलग होते हैं। पहले भी ऐसा बार-बार दिखा है। 1970 के उपचुनाव में स्वयं यूपी के मुख्यमंत्री हार गए थे। 91 के उपचुनाव में भाजपा हारी। स्थानीय फैक्टर हावी होने से उपचुनाव तो नगर या ग्राम पंचायत के चुनाव जैसा हो जाता है। लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में जनता की नजर में राष्ट्र या प्रदेश में बनने वाली सरकार होती है तो नतीजे भी अलग होते हैं।

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