रुधौली के सोनारजोत में गन्ने का रस बना रहे राम मूरत की दुकान पर रवि सोनकर ने बताया कि इधर लड़ाई राम प्रसाद और हरीश में है। पंजा मामूली है, लेकिन बीजेपी को हर जात में वोट मिल रहा है। राममूरत भी हां में हां मिलाने लगते हैं। पैड़ा में शिव बचन ने बताया कि यहां हाथी और मोदी का जोर है। औरतें आवास और शौचालय अपने नाम से पाकर बहुत खुश हैं। महादेवा विधानसभा क्षेत्र के बकुनारे में 80 साल के शिव बरन चौधरी और संपत पेड़ के नीचे छंहाते मिल गए। संपत ने दावा किया कि राम प्रसाद की जीत पक्की है। गठबंधन के वोट के साथ कुर्मी एकजुट हैं। लेकिन शिव बरन ने बताया कि उनके गांव में ही कुर्मी आधे-आधे हो गए। कैसे हाथी निकल जाएगा?
आवास मिला नहीं, पट्टा मिला तो कब्जा नहीं मिला
कप्तानगंज क्षेत्र के गढ़हा गौतम में अनुसूचित जाति की बस्ती में शिव प्रसाद 5 भाई हैं। कहते हैं कि शौचालय मिला लेकिन प्रधान आवास नहीं दिला रहे। सालों पहले पट्टा मिला लेकिन कब्जा आज तक नहीं मिला। शिव प्रसाद अपना व भाइयों का फूस का घर दिखाते हुए कहते हैं कि यहां बीजेपी, कांग्रेस और हाथी तीनों की लड़ाई है। गांव से बाहर आते हुए छात्र अनिकेत मिल गए। अनिकेत ने बताया कि उनके आसपास मायावती का वोट है। गांव में मोदी का जोर है।
पांच नदियों वाले बस्ती की सबसे बड़ी समस्या बाढ़
घाघरा, कुआनो, मनोरमा, आमी और गारिया, पांच बड़ी नदियां बस्ती के बड़े हिस्से को प्रभावित करती हैं। यहां के लोग बताते हैं कि नदियाें में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। घाघरा हर साल तबाही लाती है और किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। अन्य नदियां भी मुश्किल बढ़ाती हैं। मगर, जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं देते।