पीएम के भाषण को सुनते विद्यार्थी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में ‘परीक्षा पर चर्चा’ के दौरान विद्यार्थियों को तनावमुक्त रहने का जो गुरुमंत्र दिया, उससे गोरखपुर यूनिवर्सिटी, केंद्रीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी विद्यालय में प्रोजेक्टर और टीवी पर सीधा प्रसारण देख रहे विद्यार्थी उत्साहित नजर आए। परीक्षा की बेहतर तैयारी का प्रधानमंत्री का टिप्स विद्यार्थियों को खूब भाया। विद्यार्थियों ने कहा कि अब संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम करीब एक घंटे तक चला। इस दौरान गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में पीएम से आत्मविश्वास का पाठ सीख रहे विद्यार्थी जमे रहे। बीच-बीच में कई बार वंदेमातरम, भारत माता का जयघोष भी होता रहा। विद्यार्थियों ने कहा कि अब उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। परीक्षा को हौआ नहीं मानेंगे। क्योंकि जो पढ़ा है, परीक्षा में वही आएगा। आसानी से प्रश्न हल करके अच्छे मार्क्स हासिल करेंगे।
केंद्रीय विद्यालय नंबर एक एयरफोर्स में भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हुआ। उमंग और उल्लास के साथ विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री को सुना। साथ ही कहा कि अपनी राह खुद तय करेंगे। जो सब्जेक्ट पसंद होगा, वही पढ़ेंगे। माता-पिता या फिर किसी अन्य के दबाव में पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा देने का फैसला नहीं लेंगे।
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय चरगांवा और खोराबार की छात्राओं ने भी प्रधानमंत्री को सुनने के बाद कहा कि यह सीख हमेशा याद रहेगी। इसका पढ़ाई, फिर परीक्षा में बड़ा फायदा मिलेगा। सफलता के गुरुमंत्र ने सोच और समझ बदल दी है। अब एकाग्रता के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं है। जितना पढ़ रहे हैं, वही बहुत है। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहेंगे।
कई बार लगे ठहाके
कार्यक्रम के बीच-बीच में पीएम के चुटीले अंदाज से कई बार ठहाके भी लगे। एक छात्र के सवाल पर जब पीएम ने कहा कि खुद पर आत्मविश्वास खत्म हुआ तो 33 करोड़ देवता भी मदद नहीं कर सकते। वहीं, मां-बाप के डर से किताब खोलकर खुद ऑफलाइन रहने वाले विद्यार्थियों और मां-बाप की इच्छाओं के भूत का जिक्र हुआ तो विद्यार्थी जोर से हंसने लगे।
पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया है। समझाया कि तनाव रहित होकर परीक्षा दें। लगा कि माता-पिता और अभिभावक के अलावा प्रधानमंत्री भी हैं, जो विद्यार्थियों का भला चाहते हैं। इस कार्यक्रम से काफी कुछ सीखा है। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
- शुभि भारद्वाज, एमएससी बायोटेक
अब स्वच्छंद होकर फैसला लेंगे। माता-पिता की उम्मीदों का सम्मान करेंगे और उस पर खरा उतरने की कोशिश भी होगी लेकिन जो सब्जेक्ट पसंद होगा, वही पढ़ेंगे। सहपाठी क्या कर रहे हैं या कितने घंटे पढ़ रहे हैं, इस पर ध्यान नहीं देंगे। अपना आकलन कर कमियों को दूर करने की कोशिश होगी।
- पंकज यादव, एमए समाजशास्त्र