जयपुर और लखनऊ के बाद गोरखपुर में पहली बार दो दिवसीय साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया है। शनिवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के संवाद भवन में इसका उद्घाटन हिंदी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने किया। उन्होंने कहा साहित्य मानव से ही नहीं, पूरे ब्रह्मांड से जुड़ा है। साहित्य सदा उत्सव धर्मी होता है।
सम्मेलन में देश, प्रदेश और शहर के तमाम साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य रामदेव शुक्ल ने कहा कि सामाजिक मीडिया ने मानवीय भावनाओं को व्यक्त करने का एक नया और सशक्त मंच अवश्य दिया है लेकिन यह मुक्त मंच सर्जना नहीं है। साहित्य भी कारगर भूमिका निभा सकता है। उद्घाटन सत्र का संचालन प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा और पहले सत्र का संचालन प्रो. चितरंजन मिश्र ने किया। गोरखपुर की जमीनी खुशबू के तीन महारथी रवींद्र श्रीवास्तव (जुगानी भाई), सुल्तान अहमद रिजवी और पीके लाहिड़ी ने अपने अनुभव साझा किए। इतिहास विभाग के प्रो. चंद्रभूषण अंकुर ने गोरखपुर शहर को एक जिदा धरोहर बताया।
आकर्षण का केंद्र प्रदर्शनी
संवाद भवन से लगे अमृता कला वीथिका में लगाई गई साहित्यिक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। इसके जरिए गोरखपुर के रंगकर्म की विरासत को प्रदर्शित किया गया। युवा संगम, रंगाश्रम, रंग मंडल, इप्टा, दर्पण, अंगार, संस्कार भारती, प्रियदर्शनी और अभियान ने इसे जीवंतता प्रदान की। सुशील राय, संदीप श्रीवास्तव, संगम दूबे, राजीव केतन और शिवहर्ष द्विवेदी ने फोटोग्राफी का सजीव चित्रण किया। नादशंकर, मधुबनी पेंटिंग, दृश्यांकन जैसी तस्वीरें आकर्षण का केंद्र बनीं रहीं। जाने-माने कार्टूनिस्ट प्रदीप सुविज्ञ ने कार्टून कोने के माध्यम से सामाजिक-राजनैतिक विषयों पर चुटीले व्यंग्य से भरपूर कार्टूनों की प्रदर्शनी लगाई।
11 को प्रॉइड ऑफ गोरखपुर, तीन को आइकन अवार्ड
शहर के 11 साहित्यकार, चिकित्सक, समाजसेवी सहित अन्य को प्रॉइड ऑफ गोरखपुर अवार्ड दिया गया। इसमें प्रो. विश्वनाथ त्रिपाठी, पीके लाहिड़ी, प्यारे मोहन सरकार, शरद मणि त्रिपाठी, प्रो. हरिशंकर श्रीवास्तव, चित्रा त्रिपाठी, उर्मिला शुक्ला, मैनावती, डॉ. आरबी लाल ,पीसी श्रीवास्तव, नरेंद्र मोहन सेठ का नाम शामिल है। प्रो. हर्ष सिन्हा, डॉ. रूप कुमार बनर्जी और मुमताज खान को गोरखपुर आइकन सम्मान मिला। रवींद्र रंगधर, संदीप श्रीवास्तव और शुभेंद्र सत्यदेव को कर्मयोगी सम्मान दिया गया।
पुस्तक खरीद पर 40 फीसदी की छूट
सम्मेलन में दो प्रकाशकों ने बुक स्टाल लगाए हैं। इन पर पूर्वांचल सहित देश के नामचीन साहित्यकारों की पुस्तकें उपलब्ध हैं। 40 फीसदी तक की छूट भी है।
तीन तलाक गलत : चित्रा
साहित्यकार डॉ. चित्रा मुद्गल ने तीन तलाक को गलत ठहराया। सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंची मुद्गल ने कहा कि मुस्लिम पुरुषों ने अपने हिसाब से कानून बना लिया है। अब महिलाएं आगे आ रही हैं तो खराब लग रहा है।