माध्यमिक विद्यालयों की नगर, जिला और मंडल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने वाले कॉलेजों की मुसीबत इस सत्र में बढ़ सकती है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है कि जिले स्तर पर अगर कोई विद्यालय प्रतियोगिता में शिरकत नहीं करता है तो उसकी लिस्ट तैयार की जाए। अब तक जिले में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में लगभग 100 विद्यालय ऐसे हैं जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। जबकि अधिकांश विद्यालय छात्रों से खेल फीस तो लेते हैं लेकिन माध्यमिक विद्यालयों की खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेते है।
जिले में वित्तपोषित 117 तथा स्व वित्तपोषित 350 विद्यालय हैं लेकिन जिले स्तर पर आयोजित होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता में कुछ गिने चुने ही बालक और बालिका खेलकूद में हिस्सा लेती हैं। कुछ विद्यालय तो ऐसे भी है जिनके यहां केवल एक ही खेल में अधिक रुचि ली जाती है जबकि अन्य खेलों में टीम नहीं पहुंचती है। ऐसे में शासनादेश की खुलेआम उल्लंघन किया जाता है।
नियम के मुताबिक माध्यमिक विद्यालयों की खेलकूद प्रतियोगिता में वित्तपोषित और स्व वित्तपोषित सभी इंटर कॉलेज की टीमों को हिस्सा लेना जरूरी है। विगत कुछ सालों से जिले के गिने चुने ही विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं जबकि बाकी विद्यालय खेलकूद से कोसों दूरी बनाए हुए है। इस बार जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने वालों की लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी जिले के शारीरिक शिक्षक संघ को दी है।
अच्छी प्रतिभाएं दब रहीं : कृष्णकांत
शारीरिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने कहा कि सभी विद्यालयों के प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने से कई अच्छे खिलाड़ी आगे बढ़ने से रह जाते हैं। जिले से ऊपर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली टीमों का खर्च संबंधित जिला वहन करता है लेकिन जिले के पास कुछ विद्यालय खेल फीस जमा नहीं करते हैं। इससे प्रशिक्षकों को अपने खर्च पर खिलाड़ियों को आगे खेलने भेजना पड़ता है।
खेल फीस ली जाती है तो विद्यालयों को खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा भी लेना चाहिए। सत्र 2016-2017 में जो भी विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेगा उस विद्यालय की लिस्ट तैयार कराई जाएगी।
-एएन मौर्या, जिला विद्यालय निरीक्षक