जिले में जमीन की पैमाइश से लेकर जाति, आय, निवास आदि प्रमाणपत्रों, वरासत, तहसील, नकल खसरा, बैनामा आख्या, तहसील दिवस के संदर्भ आदि कई काम मंगलवार से ठप हो गए हैं। पांच नवंबर से चल रहे क्रमिक आंदोलन और लेखपालों के अतिरिक्त कार्य छोड़ देने से इन कामों से जुड़े प्रार्थनापत्र पहले से ही लंबित चल रहे थे। अब जिले समेत प्रदेश के सभी लेखपालों के हड़ताल पर चले जाने की वजह से संकट और गहरा सकता है।
वेतन विसंगति और वेतनमान बढ़ाने समेत आठ मांगों को लेकर प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर हड़ताल पर गए लेखपाल 12 तक कार्य बहिष्कार कर संबंधित तहसीलों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। 13 से 27 दिसंबर तक जिले के लेखपाल मुख्यालय यानी कलेक्ट्रेट पर एकत्रित होकर प्रदर्शन करेंगे। 27 से उनकी योजना विधानसभा का घेराव करने की है।
जिला लेखपाल संघ के अध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर लेखपाल पांच नवंबर से अतिरिक्त क्षेत्र का काम छोड़ने के साथ ही रैली, ब्लड डोनेशन, कैंडल मार्च कर विरोध जता रहे हैं। इसके बावजूद भी सरकार ने उनकी लंबित मांगें नहीं पूरी की जिस पर प्रांतीय नेतृत्व ने हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है।
इस दौरान प्रदेश के खंड मंत्री धनंजय श्रीवास्तव, जिला कोषाध्यक्ष हरिप्रकाश श्रीवास्तव, सदर तहसील मंत्री जावेद खान, दिनेश चन्द शर्मा, जयदेव सिंह, बृजेश सागर सिंह, रामनगीना पटेल, रामकुमार गुप्ता, रामआसरे, करुणानिधि सिंह आदि लेखपाल मौजूद रहे।