गोरखपुर जिले की तीन तहसीलों से 17 और लेखपाल सोमवार को काम पर लौट आए। हड़ताल छोड़ वापस लौटने वाले लेखपालों की कुल संख्या अब 21 हो गई है। वहीं 25 और लेखपालों को सर्विस ब्रेक और नो वर्क-नो पे का नोटिस दिया गया है। अब तक 569 को नोटिस दिया जा चुका है।
चौरीचौरा के तहसीलदार रत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि तहसील के 67 में से 65 लेखपालों को निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ये लेखपाल जल्द काम पर नहीं लौटे तो निलंबित हो जाएंगे। बताया कि बाकी बचे दो लेखपालों में से एक का इसी महीने सेवानिवृत्ति है जबकि दूसरे, हड़ताल के दिन से ही मेडिकल की छुट्टी पर हैं।
इसी तरह बांसगांव तहसीलदार वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उनके वहां कुल 78 लेखपालों में से 11 काम पर लौट आएं हैं। तहसीलदार सहजनवां लालजी विश्वक र्मा के मुताबिक दो लेखपाल जबकि तहसीलदार खजनी केशव प्रसाद के मुताबिक, उनकी तहसील से 95 में से चार लेखपाल काम पर लौट आए हैं। कैैंपियरगंज तहसील से चार लेखपाल शनिवार को ही हड़ताल छोड़ लौट आए थे।
उधर लेखपाल संघ का कहना है कि जो भी लेखपाल काम पर लौटे हैं, सभी प्रोबेशन पीरियड में हैं। इनमें कई मृतक आश्रित हैं। संघ नहीं चाहता कि नए युवाओं का कॅरियर दांव पर लगे। संघ के जिलाध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश प्रसाद ने कहा कि लेखपाल पीछे नहीं हटने वाले, चाहे शासन-प्रशासन कितनी ही दमनात्मक कार्रवाई क्यों न करें। उन्होंने कहा कि लेखपाल अपने विभाग के साथ ही कई अन्य विभागों के भी काम करते हैं। मगर शासन को उनकी समस्याओं-तकलीफों से कोई वास्ता नहीं रह गया। लेखपालों की आवाज जबरन दबाई जा रही है।